जोधपुर हाई कोर्ट ने निकायों में अधिकारियों को प्रशासक बनने पर लगाई रोक
जोधपुर (कमलेश जैन) राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने निकायों में अधिकारियों को प्रशासक बनने के आदेश पर रोक लगा दी है ।स्वास्थ्य शासन विभाग डीएलबी ने 7 फरवरी को आदेश जारी कर प्रदेश के नगर निकायों में नए बोर्ड के गठन तक महापौर सभापति और अध्यक्ष की शक्तियां आयुक्त और अधिशासी अधिकारीयो को सौंप दी कोर्ट ने डीएलबी के इस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है ।जस्टिस सुरेश बंसल की एकल पीठ ने राज्य सरकार द्वारा जवाब पेश नहीं करने और वकीलों की गैर मौजूदगी पर नाराजगी जताते हुए यह महत्वपूर्ण अंतिम आदेश पारित किया।
खुडाला- फालना के पूर्व पार्षद दी चुनौती....
पाली जिले के खुडाला फालना के पूर्व पार्षद भरत कुमार चौधरी ने अपने एडवोकेट दिविक माथुर के जरिए, यह है याचिका दायर की थी याचिका में स्वायत शासन विभाग के आयुक्त और शासन सचिव की ओर से 7 फरवरी 2026 के जारी आदेश को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने जताई नाराजगी आदेश किया स्थगित कोर्ट ने सरकार की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य शासन विभाग के 7 फरवरी के आदेश के संचालक को आगामी आदेशों तक के लिए स्थगित कर दिया।
इस आदेश में राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 326 का प्रयोग करते हुए नगर निगम परिषद और पालिकाओं में महापौर सभापति अध्यक्ष और वित्तीय समिति की शक्तियों के प्रयोग के लिए नए बोर्ड के गठन तक आयु़क्त या अधिशासी अधिकारी को अधिकृत किया गया था।
याचिका कर्ता का तर्क था कि सरकार का यह कदम नियम के खिलाफ है क्योंकि इससे नगर पालिका लेखा नियम 1963 और नगर पालिका क्रय एवं संविदा नियम 1974 के तहत अध्यक्ष वित समिति को मिले अधिकार सीधे ईओ के पास चले गए इससे निकायों में भ्रष्टाचार और निरंकुशता स्तर को बढ़ावा मिलने की आशंका थी ।
सरकार को दिया गया था जबाव का अवसर...
कोर्ट ने पूर्व में हुई सुनवाईयों के दौरान स्वांयत शासन विभाग और राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का मौका दिया था। 6 मार्च को हुई सुनवाई में जस्टिस नूपुर भाटी की कोर्ट ने याचिका कर्ता के वकील से वे डाक्यूमेंट्स भी रिकॉर्ड पर रखने कहा था जिनसे साबित हो की 7 फरवरी के आदेश के तहत प्रशासक की शक्तियां अधिशासी अधिकारी को दे दी गई है।
6 अप्रैल को हुई सुनवाई में सरकार की ओर से वकील उपस्थित हुए थे। कोर्ट ने उन्हें जवाब दाखिल करने का समय दिया था। जस्टिस सुरेश बंसल की कोर्ट में 29 अप्रैल 2026 को मामले की दोबारा सुनवाई की इस दौरान राज्य सरकार की ओर से ना कोई वकील उपस्थित हुआ और नहीं कोई जवाब पेश किया गया।
]अधिशासीअधिकारी को अधिकार देने से भ्रष्टाचार और निरकुंशता को मिलता है बढ़ावा...
याचिका कर्ता पूर्व पार्षद भरत चौधरी ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया उन्होंने राज्य सरकार ने 7 फरवरी के आदेश के जरिए नगर पालिका अध्यक्ष और वित्तीय समिति की जो अधिकार अधिशासी अधिकारियों को सोपे थे । जो गलत था हाई कोर्ट द्वारा इस आदेश पर रोक लगाने का हम स्वागत करते हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट और सख्त टिपणी करते हुए कहा अवसर देने के बावजूद अब तक रिट याचिका का जवाब दाखिल नहीं किया गया नहीं राज्य सरकार की ओर से कोई वकील पेश हुआ है।


