जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, मौसमी बीमारियों में मरीजों की जान से खिलवाड़; बिना डिग्री इलाज, मेडिकल स्टोरों पर भी धड़ल्ले से चल रही 'ओपीडी', जिम्मेदार अधिकारी मेहरबान
खैरथल (हीरालाल भूरानी) जिले में बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम के बीच मौसमी बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। बुखार, खांसी-जुकाम, वायरल और पेट संबंधी समस्याओं से परेशान लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन इसी बीच जिले में झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क तेजी से सक्रिय हो गया है।
खैरथल में मातोर रोड पर पिछले दिनों 19 वर्षीय लड़की की एक झोला छाप ने जान ले ली। गांवों और कस्बों में बिना किसी मान्यता और डॉक्टरी डिग्री के लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। हालात यह हैं कि कई जगह मेडिकल स्टोर भी इलाज के केंद्र बन गए हैं।
दवा बेचने के साथ साथ मरीजों की जांच कर दवाइयां दी जा रही हैं, इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं और बिना किसी विशेषज्ञ सलाह के इलाज किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मरीजों की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के कई गांवों और बाजारों में लंबे समय से झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और ढिलाई से इन लोगों के हौसले बुलंद हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिले में खुलेआम बिना लाइसेंस इलाज होने के बावजूद कार्रवाई न होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन और चिकित्सा विभाग से मांग की है कि ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों और नियमों के खिलाफ चल रहे मेडिकल स्टोरों पर तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों की जिंदगी के साथ हो रहा खिलवाड़ रोका जा सके।
ग्रामीण बोले - बीमारी में मजबूरी का फायदा उठा रहे लोग
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित होने के कारण लोग मजबूरी में ऐसे लोगों के पास पहुंच रहे हैं। इसका फायदा उठाकर झोलाछाप डॉक्टर मोटी रकम वसूल रहे हैं और बिना जांच दवाइयां देकर मरीजों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।


