सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में एनटीए को लगाई फटकार
नई दिल्ली (कमलेश जैन) मेडिकल प्रवेश के लिए आयोजित नीट परीक्षा के पेपर लीक होने के कारण इसे रद्द करने के मामले की सुनवाई सोमवार को उच्चतम न्यायालय में हुई। पहले दिन की सुनवाई में, सर्वोच्च न्यायालय ने परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को कड़ी चेतावनी दी। न्यायालय ने कहा, 'यह अत्यंत दुखद है कि एनटीए ने पूर्व में हुए पेपर लीक से कोई सीख नहीं ली।'
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने कहा, 'यह मामला 2024 में भी सुप्रीम कोर्ट में आया था, तब एक समिति का गठन किया गया था, जिसने कई सिफारिशें की थीं, जिन्हें स्वीकार किया गया था।' उल्लेखनीय है कि 2024 में भी नीट परीक्षा में पेपर लीक और परीक्षा केंद्रों पर धांधली की घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन उस समय पूरी परीक्षा रद्द नहीं की गई थी।
अब 2026 की नीट परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद इसे रद्द करना पड़ा है। लगभग 23 लाख छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया था, जिन्हें 21 जून को पुनः परीक्षा देनी होगी। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को निर्देश दिया कि वह गुरुवार तक हलफनामा दाखिल करे और बताए कि 2024 में दिए गए निर्देशों और मॉनिटरिंग समिति की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई। साथ ही, केंद्र सरकार और इस मामले की जांच कर रही सीबीआई से भी जवाब मांगा गया है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका में एनटीए की जगह एक मजबूत और स्वतंत्र व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि बार-बार पेपर लीक होने से लाखों छात्रों के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। याचिका में नई संस्था के गठन तक एक उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग समिति बनाने और परीक्षा की निगरानी की भी मांग की गई है। इस समिति के अध्यक्ष के रूप में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज को नियुक्त करने का सुझाव दिया गया है।


