देश के न्यायिक इतिहास में अनोखा अध्याय: राजस्थान हाईकोर्ट में पति-पत्नी जज ने एक साथ की सुनवाई

May 11, 2026 - 18:58
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देश के न्यायिक इतिहास में अनोखा अध्याय: राजस्थान हाईकोर्ट में पति-पत्नी जज ने एक साथ की सुनवाई

जोधपुर (कमलेश जैन) जोधपुर राजस्थान हाई कोर्ट में सोमवार को न्यायिक इतिहास का एक ऐसा अध्याय लिखा गया है, जो संभवतया पूरे देश में पहली बार देखने को मिला।
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में पति-पत्नी न्यायाधीश की जोड़ी ने एक साथ खंडपीठ में बैठकर मामलों की सुनवाई की।
यह ऐतिहासिक अवसर तब बना जब वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस डॉक्टर पुष्पेंद्र भाटीऔर न्यायाधीश जस्टिस डॉक्टर नूपुर भाटी ने एक साथ डिवीजन बेंच में बैठकर न्यायिक कार्य किया। न्यायपालिका के इतिहास में यह क्षण न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए विशेष महत्व रखता है।
नई रोस्टर व्यवस्था में गठित हुई ऐतिहासिक बेंच
राजस्थान हाईकोर्ट के नए रोस्टर के अनुसार जोधपुर मुख्यपीठ में गठित नई खंडपीठों में मुख्य न्यायाधीश की बेंच के बाद दूसरी बेंच के रूप में यह ऐतिहासिक जोड़ी ने सुनवाई की।
सोमवार, 11 मई को इस खंडपीठ के समक्ष कुल 45 मामलों को सूचीबद्ध किया गया। कानूनी जगत में इस खबर को लेकर विशेष उत्साह और चर्चा का माहौल रहा । अधिवक्ताओं और न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय न्यायपालिका में एक नई और सकारात्मक मिसाल प्रस्तुत हुई।
दोनों न्यायाधीशों का गौरवपूर्ण सफर
जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने अपने न्यायिक कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण मामलों में उल्लेखनीय फैसले दिए हैं और संवैधानिक व प्रशासनिक कानून के मामलों में उनकी विशेष पहचान रही है।
वहीं जस्टिस डॉ. नुपूर भाटी वरिष्ठता क्रम में 19वें स्थान पर हैं। उन्होंने भी अधिवक्ता के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और बाद में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुईं।
विशेष बात यह है कि दोनों ही न्यायाधीश अधिवक्ता कोटे से हाईकोर्ट में नियुक्त हुए हैं। दोनों की शिक्षा जोधपुर के जेएनवीयू से हुई और दोनों ही पीएचडी होल्डर हैं। अब एक ही खंडपीठ में दोनों का साथ बैठना न्यायिक इतिहास की एक दुर्लभ और ऐतिहासिक घटना बन गया है।
न्यायपालिका में नई मिसाल
भारतीय न्यायपालिका में अब तक पति-पत्नी के रूप में कई न्यायाधीश अलग-अलग अदालतों या अलग-अलग बेंचों में कार्यरत रहे हैं, लेकिन किसी हाईकोर्ट की खंडपीठ में पति-पत्नी का एक साथ बैठकर मामलों की सुनवाई करना अत्यंत दुर्लभ और संभवतया पहली घटना है। यह केवल एक औपचारिक घटना नहीं बल्कि न्यायपालिका में पारदर्शिता, पेशेवर नैतिकता और संस्थागत विश्वास का भी प्रतीक माना जा रहा है। दोनों न्यायाधीश अपने-अपने स्वतंत्र न्यायिक दृष्टिकोण और अनुभव के लिए जाने जाते हैं, जिससे इस खंडपीठ के कार्य को लेकर कानूनी समुदाय में विशेष रुचि बन गई ।
अधिवक्ताओं में उत्साह
राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में इस ऐतिहासिक बेंच को लेकर अधिवक्ताओं के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ रहा। कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इसे न्यायिक इतिहास का “गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण” बताया है।
उनका कहना है कि यह घटना न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और समान प्रतिनिधित्व का भी प्रतीक है। सोमवार को जब यह खंडपीठ अदालत कक्ष में बैठी, तब न केवल सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई की बल्कि भारतीय न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय भी दर्ज हो गया।

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