हुनर सिखाने वाले गुरुजी खुद वेतन को तरसे, राजस्थान के 5000 व्यावसायिक शिक्षकों का भविष्य अंधकार में; 13 महीनों से वेतन न मिलने से शिक्षकों के सामने खड़ा हुआ आजीविका का संकट
तखतगढ़ पाली/बरकत खान) राजस्थान के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को आईटी, हेल्थ, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, ऑटोमोटिव और रिटेल जैसे व्यावसायिक विषयों के जरिए रोजगार के लिए तैयार करने वाले शिक्षक खुद आज गहरे आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहे हैं। प्रदेश के करीब 4019 सरकारी विद्यालयों में समग्र शिक्षा अभियान (समसा) के तहत सेवाएं दे रहे 5 हजार से अधिक व्यावसायिक शिक्षक (Vocational Trainers) पिछले 13 महीनों से बिना वेतन के काम करने को मजबूर हैं, जिससे उनके परिवारों के सामने पालन-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
प्लेसमेंट एजेंसियों की लापरवाही और ठेका प्रथा का दंश:
व्यावसायिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि विभिन्न प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत होने के कारण उनका भविष्य पूरी तरह असुरक्षित है। पाली सहित राज्यभर के जिलों में कार्यरत इन शिक्षकों का भुगतान इसलिए अटका हुआ है क्योंकि प्लेसमेंट एजेंसियां समय पर आवश्यक फाइलें शिक्षा विभाग को नहीं भेज रही हैं। हैरानी की बात यह है कि एक तरफ शिक्षा विभाग लगातार नई गतिविधियों और काम के आदेश जारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इन शिक्षकों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। महंगाई के इस दौर में शिक्षक बच्चों की फीस, घर का किराया और रोजमर्रा के खर्चों के लिए कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
70 से अधिक जनप्रतिनिधियों का समर्थन, फिर भी सरकार मौन:
व्यावसायिक शिक्षक संघ के पाली ब्लॉक अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सोलंकी (रानी) ने बताया कि इस जायज मांग को लेकर प्रदेश के 70 से अधिक विधायकों और सांसदों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र, ज्ञापन और ईमेल भेजकर अपना समर्थन जताया है। इसके बावजूद सरकार इस गंभीर मुद्दे पर लगातार चुप्पी साधे हुए है। यह न केवल शिक्षकों के साथ घोर अन्याय है, बल्कि युवाओं के कौशल विकास (Skill Development) के सपनों के साथ भी खिलवाड़ है। शिक्षकों की प्रमुख मांगें:
-
बकाया वेतन का तुरंत भुगतान: पिछले 13 महीनों से अटका हुआ वेतन सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर जारी करवाए।
-
हरियाणा मॉडल लागू हो: ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर, हरियाणा राज्य की तर्ज पर व्यावसायिक शिक्षकों को सीधे सरकारी सेवा में समायोजित किया जाए।
शिक्षक संघ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो पूरे राजस्थान के व्यावसायिक शिक्षक सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

