धार्मिक आयोजन सनातन संस्कृति की पहचान, ऐसे आयोजनों से समाज में एकता, संस्कार एवं आस्था का संचार होता है- मेवाड़ा

May 24, 2026 - 20:26
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धार्मिक आयोजन सनातन संस्कृति की पहचान, ऐसे आयोजनों से समाज में एकता, संस्कार एवं आस्था का संचार होता है- मेवाड़ा

तखतगढ़ (बरकत खान) धनापुरा गांव स्थित कुमावत कांसा परिवार की कुलदेवी श्री ब्राह्मणी माता मंदिर में आयोजित दो दिवसीय 18वां वार्षिक मेला रविवार को धार्मिक उल्लास एवं भक्तिमय माहौल के साथ सम्पन्न हुआ। मेले में दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माताजी के दर्शन कर खुशहाली की कामना की। मेले के समापन पर मंदिर शिखर पर विधि-विधान के साथ ध्वजा चढ़ाई गई तथा महाआरती के बाद महाप्रसादी का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मेले के पहले दिन शुक्रवार रात एक शाम ब्राह्मणी माता के नाम विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया। भजन कलाकार मनीष एंड पार्टी कालंद्री एवं ललित कुमार संत एंड पार्टी ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुतियां देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। कलाकारों ने गणपति व गुरु वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके बाद माताजी की महिमा से जुड़े भजनों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे।

 वहीं डांसर मुकेश जोशी ने भी अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। भजन संध्या के दौरान भामाशाहों द्वारा अगले वर्ष के आयोजन की बोलियां भी उत्साह के साथ ली गई। पूरी रात चले कार्यक्रम में श्रद्धालु माताजी के जयकारों के साथ भक्ति में लीन नजर आए। कार्यक्रम में बाबुलाल, हंसाराम, अमृतलाल, शंकरलाल, धर्माराम, पुखराज, जवानाराम, खंगारराम, संताेष कुमार अादि का सहयाेग रहा।

जिस समाज की जड़ें अपनी संस्कृति से जुड़ी रहती हैं, वह समाज हमेशा मजबूत और संगठित रहता है-मेवाड़ा
मेले के दूसरे दिन सुबह लाभार्थी परिवार द्वारा गाजे-बाजे एवं ढोल-ढमाकों के साथ मंदिर शिखर पर ध्वजा चढ़ाई गई। लाभार्थी परिवार अपने निवास स्थान से ध्वजा लेकर मंदिर पहुंचे। महिलाओं ने भी माताजी के मंगल गीत गाए। कार्यक्रम में विधानसभा सुमेरपुर के कांग्रेस प्रत्याशी हरिशंकर मेवाड़ा ने भी शिरकत की। साथ में दलपतसिंह व तेजपालसिंह माैजूद रहे। आयोजन समिति द्वारा मेवाड़ा व अतिथियाें का माला एवं साफा पहनाकर बहुमान किया गया।

 इस दौरान मेवाड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि धार्मिक आयोजन हमारी सनातन संस्कृति की पहचान हैं और ऐसे आयोजनों से समाज में एकता, संस्कार एवं आस्था का संचार होता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मेवाड़ा ने कहा कि गांवों में होने वाले धार्मिक मेले और भजन संध्याएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कारों को आगे बढ़ाने का सशक्त मंच हैं।

उन्होंने कहा कि जिस समाज की जड़ें अपनी संस्कृति से जुड़ी रहती हैं, वह समाज हमेशा मजबूत और संगठित रहता है। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ब्राह्मणी माता मेले जैसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए। इसके बाद माताजी की महाअारती की गई व महाप्रसादी का अायाेजन किया गया। जहां समाज के लाेगाें ने बढ़चढ कर लाभ लिया।

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