पिपलाई की धरा पर पहली बार क्षमा मूर्ति आचार्य विशद सागर जी का मंगल प्रवेश; प्रशासन और आपसी सौहार्द की मिसाल पेश
बामनवास/सवाई माधोपुर (राजस्थान) धर्म नगरी पिपलाई के इतिहास में शनिवार का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया, जब समाधि सम्राट गणचार्य विराग सागर जी महाराज के शिष्य क्षमा मूर्ति आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज का ससंघ पहली बार इस धरा पर मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री के आगमन से संपूर्ण जैन समाज और क्षेत्रवासी हर्षित हो उठे।
दिगंबर जैन मंदिर के प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि वर्ष 2006 में जब पिपलाई के मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ था, तब भगवान महावीर स्वामी का पंचकल्याणक महोत्सव भी आचार्य श्री के सान्निध्य में जयपुर में संपन्न हुआ था। आज वर्षों बाद उन्हीं गुरुवर के कदम पिपलाई में पड़ने से समाज धन्य हो गया। मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों ने श्रद्धापूर्वक गुरुदेव के पाद प्रक्षालन किए।
राजस्थान सरकार के संकल्प पत्र की घोषणा के अनुरूप जैन श्रमणों के पैदल विहार के दौरान ठहरने और आहार-विहार की सुविधा हेतु 'विहार धाम' के लिए चिन्हित भूमि का आचार्य श्री विलक्ष्य सागर जी एवं विशाल सागर जी महाराज ने निरीक्षण किया। मुनिसंघ ने इस स्थान पर विहार धाम बनाने हेतु अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
- प्रशासन की भूमिका की सराहना
जैन साधु-साध्वियों के पैदल विहार, सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सवाई माधोपुर जिला प्रशासन द्वारा निभाई जा रही सक्रिय भूमिका की आचार्य श्री ने विशेष रूप से सराहना की। प्रशासन के सहयोग को देखकर मुनिसंघ ने अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की और जिले व प्रदेश की खुशहाली का आशीर्वाद दिया।
- विद्यार्थियों को मिला करियर और तनाव मुक्ति का मंत्र
विहार के दौरान आचार्य श्री की शिष्या आर्यिका श्री भक्ति भारती माताजी ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, खेड़ली में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों को करियर चुनाव के विकल्प बताए और तनाव दूर करने के आध्यात्मिक तरीके सिखाए। माताजी ने शिक्षा के क्षेत्र में भगवान ऋषभदेव के ऐतिहासिक योगदान पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
- सांप्रदायिक सौहार्द: गुर्जर समाज ने पेश की मिसाल
गुरुदेव के ससंघ प्रवास के दौरान आपसी प्रेम और भाईचारे की अनूठी तस्वीर देखने को मिली। खेड़ली गांव में मुनिसंघ के ठहरने और आहार की व्यवस्था सोन्या गुर्जर और दिलीप गुर्जर के आवास पर की गई। इस सहयोग के लिए जैन समुदाय ने गुर्जर समाज का हृदय से आभार व्यक्त किया। पिपलाई और खेड़ली के श्रावकों को आचार्य विशद सागर जी, मुनि विपिन सागर जी, मुनि विलक्ष्य सागर जी, मुनि विभोर सागर जी, मुनि विशाल सागर जी, आर्यिका भक्ति भारती माता जी, क्षुल्लक विसोम सागर जी और क्षुल्लिका वात्सल्य भारती माता जी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।


