बाल विवाह मुक्त भारत अभियान: 100 दिवसीय कार्यक्रम, बड़ौदामेव में हुई बैठक
अलवर के गोविंदगढ़ स्थित बड़ौदामेव कस्बे के समीपवर्ती ग्राम पंचायतों रोणपुर, शीतल और खरसनकी में 'बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' के तहत एक जाजम बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक 100 दिवसीय कार्यक्रम का हिस्सा थी, जिसमें महिलाओं और बालिकाओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी गई।
महिला अधिकारिता विभाग की पर्यवेक्षक मोनिका ने बताया कि कम उम्र में विवाह करने से कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे बालक-बालिकाओं की शिक्षा अधूरी रह जाती है। कम उम्र में मां बनने पर बच्चों में कुपोषण की समस्या बढ़ती है और मातृ मृत्यु दर में भी वृद्धि होती है।
साथिनों द्वारा महिलाओं को बाल विवाह अधिनियम 2006 के प्रावधानों से अवगत कराया गया। इस अधिनियम के तहत विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष निर्धारित है। इसके अतिरिक्त, महिलाओं को महिला अधिकारिता विभाग की लाडो प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
इस अवसर पर ग्राम साथिनों के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं भी उपस्थित रहीं।

