जमीनी विवाद में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत, दरोगा पर मिलीभगत का आरोप; रामगढ़ताल क्षेत्र में तनाव
गोरखपुर (शशि जायसवाल) रामगढ़ताल थानाक्षेत्र के महेवा फलमंडी इलाके में 8 दिसंबर को हुए जमीनी विवाद के दौरान हुई मारपीट में घायल अनिल साहनी की गुरुवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने स्थानीय पुलिस चौकी प्रभारी पर आरोपियों से साठगांठ का गंभीर आरोप लगाते हुए मामले में हत्या की धाराएं बढ़ाने की मांग की है।
परिजनों के अनुसार: - दादी के भतीजों ने छल-कपट से जमीन अपने नाम करवा ली थी, जिसका मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। 8 दिसंबर को विपक्षी अमित, रवि, धर्मेंद्र और अतुल जमीन पर जबरन कब्जा करने पहुंचे थे। विरोध करने पर आरोपियों ने अनिल साहनी और उनकी पत्नी शारदा पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल- अनिल की पत्नी शारदा और माता कमली देवी ने फलमंडी चौकी प्रभारी दरोगा पंकज पर गंभीर आरोप लगाए हैं
हल्की धाराओं में कार्रवाई- परिजनों का कहना है कि पुलिस ने जानलेवा हमले के बावजूद मामले को बेहद हल्का (NCR) दिखाकर टाल दिया।
पक्षपात का आरोप: आरोप है कि दरोगा ने घायल अनिल का मेडिकल तो कराया, लेकिन चोटिल पत्नी शारदा का मेडिकल नहीं कराया।
मिलीभगत का अंदेशा: परिजनों ने 10 दिसंबर को ही एसएसपी से मिलकर दरोगा की शिकायत की थी, लेकिन कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
इलाज के दौरान तोड़ा दम - अनिल साहनी की हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल से लखनऊ PGI रेफर किया गया था। लंबे संघर्ष के बाद गुरुवार (29 जनवरी) को उनकी मृत्यु हो गई। शुक्रवार को शव घर पहुँचते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।
शारदा, मृतक की पत्नी का कहना है कि - "दरोगा पंकज शुरू से ही दबंगों का साथ दे रहे थे। उन्हीं की लापरवाही और मिलीभगत के कारण आज मेरे पति की जान गई है। मेरे तीन छोटे बच्चे हैं, अब हमारा पालन-पोषण कैसे होगा?"
परिजनों की प्रमुख मांगें: आरोपी अमित, रवि, धर्मेंद्र और अतुल के खिलाफ तत्काल हत्या का मुकदमा (धारा 302) दर्ज कर गिरफ्तारी हो। कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले दरोगा पंकज पर दंडात्मक कार्यवाही की जाए। पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय प्रदान किया जाए।
अब देखना यह है कि गोरखपुर पुलिस प्रशासन इस मामले में दोषी दरोगा और हत्यारोपियों पर क्या ठोस कार्यवाही करता है।


