धार्मिक नगरी मेहरू कलां में श्रीमद्भागवत कथा का भावपूर्ण प्रवाह, कृष्ण बाल लीलाओं ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
मेहरू कलां (बृजेश शर्मा) धार्मिक नगरी मेहरू कलां में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्तिरस की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। महंत हरि दास महाराज के सानिध्य में कथा वाचक रामदास महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथा वाचन के दौरान रामदास महाराज ने श्रीकृष्ण के जन्म उपरांत उनकी बाल लीलाओं, माखन चोरी, नंद बाबा के आंगन में किलकारियां, तथा यमलार्जुन (दो वृक्षों) के उद्धार प्रसंग का सजीव चित्रण किया। इन लीलाओं के माध्यम से उन्होंने बताया कि प्रभु की प्रत्येक लीला जीवों के उद्धार और धर्म की स्थापना के लिए होती है।
कथा क्रम में आगे बढ़ते हुए महाराज ने पूतना वध, अघासुर, बकासुर जैसे भयंकर राक्षसों के संहार तथा कालिया नाग मर्दन की कथा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल रूप में ही अधर्म, अन्याय और अहंकार का नाश कर धर्म की रक्षा की।
वृंदावन लीला प्रसंग में गिरिराज पर्वत (गोवर्धन पर्वत) की महिमा का उल्लेख करते हुए रामदास महाराज ने कहा कि जब इंद्र के अहंकार से ब्रजवासियों की रक्षा हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गिरिराज पर्वत धारण किया, तब सम्पूर्ण ब्रजभूमि ने प्रभु की शरणागति स्वीकार की।
महंत हरि दास महाराज ने इस अवसर पर कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो मानव को भक्ति, प्रेम और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करती है।
कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धर्मलाभ ले रहे हैं। भजन-कीर्तन, जयकारों और भक्ति संगीत से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधाओं हेतु समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं।
- विराट हिन्दू सम्मेलन, सनातन संस्कृति की रक्षा का लिया संकल्प
शुक्रवार को विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें साधु-संतों, धर्माचार्यों एवं सनातन धर्मावलंबियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य सनातन संस्कृति की रक्षा, सामाजिक एकता और राष्ट्र धर्म के प्रति जागरूकता को मजबूत करना रहा।
सम्मेलन का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ संतों के सानिध्य में सम्पन्न हुई, वहीं मुख्य वक्ताओं ने सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्र निर्माण में हिन्दू समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हिन्दू समाज को संगठित होकर अपने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सनातन धर्म की मर्यादाओं को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
वक्ताओं ने धर्मांतरण, सामाजिक विघटन, सांस्कृतिक आक्रमण जैसी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विराट हिन्दू सम्मेलन का उद्देश्य किसी के विरोध में नहीं, बल्कि समाज को जागृत करने के लिए है। सम्मेलन में धर्म, शिक्षा, संस्कार और सेवा को हिन्दू समाज की मूल शक्ति बताया गया।
इस अवसर पर संत-महात्माओं ने कहा कि जब-जब समाज में अधर्म बढ़ा है, तब-तब संगठन और एकता के माध्यम से सनातन संस्कृति ने स्वयं को सशक्त किया है। सम्मेलन के दौरान भारत माता, भगवान श्रीराम एवं सनातन धर्म के जयघोष से सम्पूर्ण परिसर गूंज उठा।


