नौतपा की गर्मी ने बदली खैरथल की थाली, ठंडक देने वाले पेयों की बढ़ी मांग
खैरथल (हीरालाल भूरानी)
खैरथल में नौतपा की प्रचंड गर्मी ने न केवल जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि लोगों की खानपान की आदतों और बाजार की रौनक को भी बदल दिया है। तेज धूप, गर्म हवाओं और लगातार बढ़ते तापमान के कारण अब हरी सब्जियों की थाली धीरे-धीरे घटती जा रही है। उनकी जगह छाछ, दही, रायता, आमरस, नींबू पानी और कच्ची केरी जैसे पारंपरिक पेयों ने ले ली है।
खैरथल की सब्जी मंडियों में इन दिनों सब्जियों की आवक पर्याप्त है, लेकिन ग्राहकी कमजोर पड़ गई है। सुबह के समय हल्की चहल-पहल दिखाई देती है, लेकिन दोपहर होते ही बाजार सूने पड़ जाते हैं। भीषण गर्मी के चलते लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते हैं, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सब्जी विक्रेता गोपालदास पेशवानी और रामचंद्र खतनानी का कहना है कि गर्मी में हरी सब्जियां जल्दी मुरझा जाती है। सुबह मंडी से लाया गया माल शाम तक ताजगी खो देता है,
इसलिए अब कई दुकानदार सीमित मात्रा में ही सब्जियां मंगवा रहे हैं। ठेला संचालक भी दोपहर में बाजार में निकलना कम कर रहे है।
वहीं, गर्मी बढ़ने के साथ नींबू, आम, कच्ची केरी और इमली की बिक्री में उछाल आया है। लोग भारी और मसालेदार भोजन से परहेज कर ठंडक देने वाले पारंपरिक पेयों की और अधिक आकर्षित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में केरी और इमली के पेय लू से बचाव के भरोसेमंद घरेलू उपाय माने जाते हैं। गर्मी में लोकप्रिय पारंपरिक पेयों में छाछ और रायता पाचन को दुरुस्त रखते हुए ठंडक पहुंचाते हैं। दही शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है। केरी और इमली का पानी और आवश्यक लवणों की कमी नहीं होने देता। नींबू पानी विटामिन-सी से भरपूर होता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है। नौतपा की तपिश ने खैरथल में लोगों की थाली और बाजार दोनों को बदल दिया है। हल्का और ठंडक देने वाला खानपान अब लोगों की प्राथमिकता बन गया है, जिससे हरी सब्जियों की मांग घट रही है और बाजार की रौनक प्रभावित हो रही है।


