खैरथल में 'कचरा' बनी गोसेवा:पॉलीथिन खाने को मजबूर गौवंश, धरातल पर दावे गायब
खैरथल (हीरालाल भूरानी)
एक ओर जहां विभिन्न हिन्दू संगठन गौ माता को राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग को लेकर लगातार आवाज बुलंद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के हालात इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे है।
खैरथल शहर के लगभग हर वार्ड में जगह-जगह लगे कचरे के ढेर गौवंश के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। खुले में फैले कचरे में भोजन तलाशती गायें पॉलीथिन, प्लास्टिक व अन्य हानिकारक सामग्री निगलने को मजबूर है, जिससे वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रही है और कई गौवंश अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा नियमित सफाई व्यवस्था और कचरा निस्तारण के दावे धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे। वार्डों में बने कचरे के ढेरों पर सुबह से शाम तक गायों का जमावड़ा लगा रहता है। कई बार बीमार व घायल अवस्था में गौवंश सड़कों पर तड़पते दिखाई देते हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आता।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में नियमित कचरा उठान की प्रभावी व्यवस्था की जाए तथा खुले में कचरा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही गौवंश के लिए चारा व सुरक्षित स्थान की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि गो सेवा केवल नारों तक सीमित न रहकर धरातल पर भी दिखाई दे। लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में गौ माता के संरक्षण की बात की जाती है तो सबसे पहले उन्हें कचरे और पॉलीथिन से मुक्त वातावरण देना जरूरी है।


