बांगड़ अस्पताल में 35 संविदा नर्सिंगकर्मियों को अचानक निकाला; 4 महीने से वेतन भी बकाया, कर्मचारियों ने किया भारी हंगामा
पाली (राजस्थान) स्थानीय बांगड़ राजकीय अस्पताल और एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में पिछले कई वर्षों से अपनी सेवाएँ दे रहे 35 संविदा नर्सिंगकर्मियों को मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा अचानक कार्यमुक्त (नौकरी से मुक्त) किए जाने का एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। इस तानाशाहीपूर्ण आदेश के विरोध में आज मंगलवार सुबह पीड़ित नर्सिंगकर्मियों ने अस्पताल परिसर में एकत्रित होकर जमकर नारेबाजी की और अस्पताल अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई।
अस्पताल प्रशासन के इस अचानक लिए गए फैसले से कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा बताते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
- दोहरे रोजगार का संकट: नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों में कई ऐसे शादीशुदा जोड़े हैं, जो पति-पत्नी दोनों इसी अस्पताल में संविदा पर कार्यरत थे। जालोर से आकर पाली में किराए पर रह रहे दंपत्ति भानूप्रिया और नारायणलाल, तथा पिछले 3 साल से कार्यरत केसरसिंह व उनकी पत्नी सुनिता कंवर अब एक साथ बेरोजगार हो गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर अब उन्हें नया रोजगार कौन देगा और वे अपने छोटे बच्चों का पालन-पोषण कैसे करेंगे?
- 4 महीने से वेतन बकाया और आर्थिक शोषण: प्रदर्शनकारी नर्सिंगकर्मी कृष्णा शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें पिछले 4 महीनों से वेतन तक नहीं दिया है। इसके अलावा, नियमों के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों का पीएफ (PF) भी नहीं काटा जा रहा था।
- सिक्योरिटी राशि डकारने का आरोप: कर्मचारियों ने बताया कि जॉइनिंग के समय उन सभी से 15-15 हजार रुपये के डिमांड ड्राफ्ट (DD) लिए गए थे, जिन्हें नौकरी से निकाले जाने के बाद भी वापस नहीं लौटाया जा रहा है।
- 115 और कर्मचारियों पर मंडरा रहा खतरा: अस्पताल में वर्तमान में कुल 150 नर्सिंगकर्मी संविदा पर तैनात हैं। यह 35 लोगों की केवल पहली सूची है, जिससे शेष बचे 115 कर्मचारियों में भी नौकरी जाने का भय व्याप्त हो गया है।
प्रशासन का पक्ष: इस मामले में बांगड़ अस्पताल अधीक्षक डॉ. कैलाश परिहार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. दिलीप सिंह चौहान के आदेश पर इन 35 संविदाकर्मियों को कार्यमुक्त किया गया है। इनकी जगह नई स्थाई भर्ती के नर्सिंगकर्मियों ने कार्यभार संभाल लिया है, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- कर्मचारियों की मांग:
पीड़ित नर्सिंगकर्मियों ने चेतावनी दी है कि वे पिछले कई वर्षों से मात्र 8,000 रुपये के अल्प वेतन पर इस उम्मीद में काम कर रहे थे कि एक दिन उन्हें स्थाई किया जाएगा। लेकिन सरकार और प्रशासन ने उन्हें तोहफे में बेरोजगारी दी है। कर्मचारियों ने मांग की है कि उनका बकाया 4 महीने का वेतन तुरंत जारी किया जाए, सिक्योरिटी राशि (DD) लौटाई जाए और उन्हें पुनः रोजगार की गारंटी दी जाए। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन उग्र रूप लेगा।


