पुरा-वैभव: ओड़िशा के सिमिलीपाल में चट्टान पर उकेरी गणेश प्रतिमा ने खोला हजार साल पुराना इतिहास
मयूरभंज, (ओड़िशा)
ओड़िशा के मयूरभंज से इतिहास और पुरातत्व प्रेमियों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। सिमिलीपाल बायोस्फीयर रिजर्व की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित 'आकर्शिला' नामक स्थान पर एक प्राचीन प्रस्तर प्रतिमा मिली है, जिसने इलाके के हजार साल पुराने इतिहास का एक नया अध्याय खोल दिया है। सिंदूर और तेल से सजी इस प्राचीन प्रतिमा को स्थानीय लोग भगवान गणेश का स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजते हैं।
पहाड़ियों में मिला दुर्लभ शैल चित्रों का भंडार
इस प्रतिमा के आसपास जब पुरातत्वविदों ने शोध किया, तो उन्हें 7वीं और 8वीं शताब्दी के बेहद दुर्लभ शैल-उत्कीर्णन (Rock Carvings) मिले हैं। यह पूरा खोजी क्षेत्र लगभग 500 वर्ग मीटर के दायरे में फैला हुआ है, जहाँ की चट्टानों पर प्राचीन काल की मानव आकृतियां, पशु, विभिन्न धार्मिक प्रतीक और प्राचीन लेख उकेरे गए हैं।
इतिहास की बड़ी कमी हुई पूरी
आपको बता दें कि मयूरभंज और बुढ़ाबलंगा नदी घाटी को प्रागैतिहासिक औजारों व प्राचीन बस्तियों के लिए पहले से ही बेहद समृद्ध माना जाता रहा है। हालांकि, इस पूरे बेसिन में अब तक शैलचित्रों (Rock Art) का कोई बड़ा ठिकाना या प्रमाण नहीं मिल पाया था। लेकिन 'आकर्शिला' में हुई इस नई और ऐतिहासिक खोज ने इतिहास की इस बड़ी कमी को हमेशा के लिए पूरा कर दिया है, जिससे भारत के पुरा-वैभव को एक नई पहचान मिली है।


