सूरत सेवा समिति और ग्रामीणों के सहयोग से शुरू हुआ वंदे गंगा जल संचयन अभियान; 12 बंद बोरवेलों से रिचार्ज होगा जलस्तर
बावड़ी (जोधपुर) मिश्रीलाल लखारा । बावड़ी उपखंड क्षेत्र के नांदिया कलां गांव में जल संरक्षण की दिशा में एक मिसाली पहल देखने को मिली है। सूरत सेवा समिति के तत्वावधान में संचालित "कर्मभूमि से जन्मभूमि" वंदे गंगा जल संचयन जनभागीदारी अभियान के तहत वर्षों से सूखे और बंद पड़े बोरवेलों को भूजल रिचार्ज संरचना (Recharge Pit) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ऐसे किया जा रहा है वर्षा जल का संचयन
जल संरक्षण प्रमुख नाहरसिंह भाटी ने जानकारी देते हुए बताया कि सूरत सेवा समिति, सूरत के आर्थिक व सामाजिक सहयोग से बंद पड़े बोरवेलों के चारों ओर गड्ढे खोदकर और ईंटों का पक्का ढांचा (खेळी) तैयार कर वर्षा जल को सीधे भूमिगत जल स्रोतों तक पहुंचाया जा रहा है। इस तकनीक से जहां एक ओर तेजी से गिरते भूजल स्तर में सुधार होगा, वहीं आसपास की जमीन में नमी बनी रहने से वनस्पति और पर्यावरण को भी संजीवनी मिलेगी।
प्रथम चरण में 5 बोरवेलों पर काम जारी
अभियान के तहत गांव के 12 बंद पड़े बोरवेलों को चिह्नित किया गया है, जिनमें से प्रथम चरण में 5 बोरवेलों को रिचार्ज स्ट्रक्चर में बदलने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। यह पूरा अभियान सूरत सेवा समिति के श्यामसुंदर राठी तथा समस्त महाजन के राज्य समन्वयक हरनारायण सोनी (ओसियां) के कुशल मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने किया बढ़-चढ़कर श्रमदान
इस जनभागीदारी अभियान में युवा प्रशासक जसवंत सिंह भाटी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी नाहरसिंह भाटी, कुन्नाराम जाणी, कानसिंह पंवार, मोहनराम गर्ग, जेठूसिंह, हुक्मसिंह, रेवन्तराम मेघवाल और श्यामराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सक्रिय रूप से श्रमदान किया। ग्रामीणों का मानना है कि बंद बोरवेलों का यह पुनः उपयोग आने वाले समय में भीषण जल संकट से निपटने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

