भीगते मौसम में भी डटी रहीं आशा सहयोगिनियां: कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन, राज्य कर्मचारी का दर्जा और 26 हजार वेतन की उठी मांग
आशा सहयोगिनियों का फूटा गुस्सा: कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
भीलवाड़ा: आशा सहयोगिनी यूनियन (सीटू) जिला कमेटी के नेतृत्व में शुक्रवार को जिलेभर की आशा सहयोगिनियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान महिलाओं ने राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और बाद में जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर राज्य कर्मचारी का दर्जा देने सहित कई मांगें उठाईं।
बारिश के बीच भी जारी रहा प्रदर्शन और नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान अचानक बारिश शुरू हो गई, लेकिन इसके बावजूद हौसले से लबरेज आशा सहयोगिनियां बारिश में भी डटी रहीं और अपना विरोध लगातार जारी रखा। यूनियन की प्रतिनिधि मंजू लालपुरिया ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आशा सहयोगिनियां अपनी मांगों को लेकर पहले भी कई बार ज्ञापन सौंप चुकी हैं और हड़ताल कर चुकी हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक सामान्य मजदूर भी दिहाड़ी में इससे अधिक राशि घर ले जाता है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा सहयोगिनियों को मात्र 150 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान कर उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से उठाई गईं ये मांगें
ज्ञापन के माध्यम से आशा सहयोगिनियों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं:
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राज्य कर्मचारी का दर्जा और वेतन: आशा सहयोगिनियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए और न्यूनतम 26 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन तय किया जाए।
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अतिरिक्त कार्यों से मुक्ति: उनसे केवल उनका मूल स्वास्थ्य कार्य ही कराया जाए, अन्य अतिरिक्त कार्य या ओबीसी सर्वे जैसे बोझिल काम उनके जिम्मे न डाले जाएं।
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सेवानिवृत्ति लाभ: सेवा पूरी होने पर पेंशन और 50 लाख रुपए की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाए।
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मानदेय और भर्ती कोटा: बकाया मानदेय का समय पर भुगतान हो तथा आगामी एएनएम भर्ती में अनुभवी आशा सहयोगिनियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण (कोटा) सुनिश्चित किया जाए।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के अंत में यूनियन ने सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो वे मजबूरन अनिश्चितकालीन हड़ताल और उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगी। इस प्रदर्शन के दौरान सुशीला, बृजेश देवी, ममता सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियां और ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं।

