27 साल पुराना अंडरटेकिंग आदेश निरस्त, तीन दशक बाद बदले पंचायत व निकाय चुनाव के नियम
लक्ष्मणगढ़ (अलवर)। राजस्थान में करीब 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ने के नियमों में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। राज्य सरकार के फैसले के बाद अब दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति भी पंचायत और शहरी निकाय चुनाव में प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी ठोक सकेंगे। सरकार द्वारा इस प्रतिबंध को समाप्त किए जाने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मार्च 2026 में जारी अधिसूचना के अनुसार संशोधित कानून प्रभावी हो चुका है। इसके साथ ही आयोग ने प्रत्याशी से 'दो से अधिक संतान नहीं होने' संबंधी अंडरटेकिंग लेने के 27 साल पुराने आदेश को भी पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। अब आगामी चुनावों में उम्मीदवारों पर दो संतान की बाध्यता लागू नहीं होगी।
भैरोंसिंह शेखावत सरकार ने लगाया था प्रतिबंध
उल्लेखनीय है कि तीन दशक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कानून लागू किया था। इसके तहत पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और नगर निकाय पार्षद पदों के लिए दो से अधिक संतान वाले व्यक्तियों को अयोग्य घोषित कर दिया जाता था।
भजनलाल सरकार ने दी बड़ी राहत
अब भजनलाल सरकार द्वारा नया कानून लागू किए जाने के बाद इस पाबंदी को हटा लिया गया है। इसके अतिरिक्त राजस्थान नगरपालिका अधिनियम में संशोधन कर कुछ बीमारियों को 'लाइलाज' मानकर चुनाव लड़ने से रोकने वाला पुराना प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के हजारों ऐसे नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है, जो इस नियम की वजह से सालों से चुनाव लड़ने से वंचित थे।

