भीलवाड़ा में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा को झेलना पड़ा जनता का तीखा विरोध: 'थांका राज में 12 महीने...' वाले बयान पर भड़के लोग, जयपुर आवास पर धरने की दी चेतावनी
भीलवाड़ा में यूडीएच मंत्री का विरोध: यूआईटी में सेक्रेटरी न होने पर भड़के लोग, मंत्री बोले-'थांका राज में कोनी लागता 12 महीना'
भीलवाड़ा / राजस्थान : शुक्रवार को भीलवाड़ा दौरे पर पहुंचे यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा को शहरवासियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। मंत्री खर्रा यहां शहरी सेवा कैंप के फॉलोअप शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान जनता ने उन्हें घेरकर शिकायत की कि पिछले तीन महीनों से यूआईटी (न्यास) में सेक्रेटरी का पद खाली पड़ा है, जिसके कारण आम जनता के जरूरी काम पूरी तरह ठप हो चुके हैं। जनता की इस शिकायत पर मंत्री खर्रा का जवाब था—“अरे भाया थांका राज में 12-12 महीना कोनी लागता।” मंत्री के इस बेरुखे जवाब से गुस्साए लोगों ने चेतावनी दी कि यदि पांच दिन के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे जयपुर में मंत्री के आवास के बाहर धरना देंगे।
यूआईटी के बाहर नारेबाजी और पीड़ित अशोक जैन का दर्द
मंत्री के यूआईटी पहुंचने पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक वहां एकत्र हो गए और जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने शहरी सेवा शिविर को महज एक मज़ाक बनाकर रख दिया है। जनता को पट्टे नहीं मिल रहे हैं और 'स्व मोटो' ले आउट तैयार न होने के कारण बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
एक पीड़ित नागरिक अशोक जैन ने अपनी दर्दभरी दास्तां बताते हुए कहा कि उसने 96 लाख रुपये में यूआईटी की नीलामी में एक प्लॉट खरीदा था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उसे उस पर कब्जा नहीं मिल पाया है। इसके अलावा, 9 महीने पहले यूआईटी द्वारा 3081 प्लॉट के लिए निकाली गई लॉटरी में भारी गड़बड़ियों के आरोप भी सामने आए। हाईकोर्ट की रोक के चलते जहां आवंटियों को पट्टे और कब्जे नहीं मिले, वहीं जिन लोगों को प्लॉट नहीं मिले, उनमें से कई को अब तक उनकी रिफंड राशि भी वापस नहीं मिल पाई है। हालांकि, इन गंभीर शिकायतों के बावजूद मंत्री लोगों की बातों को दरकिनार कर वहां से रवाना हो गए। जब मीडिया ने यूआईटी में सेक्रेटरी न होने और लॉटरी विवादों में घिरे एक्सईएन रविश श्रीवास्तव की दोबारा नियुक्ति पर सवाल पूछा, तो मंत्री ने यह कहते हुए किनारा कर लिया कि सेक्रेटरी लगाना सीएम का विषय है और वे इस मामले को दिखवाएंगे।
निकाय चुनावों और 'ट्रिपल टेस्ट' पर मंत्री के बड़े बयान
विरोध-प्रदर्शन के बीच मीडिया से बातचीत करते हुए यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने राज्य में आगामी निकाय चुनावों को लेकर सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निकाय चुनावों को निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मंत्री खर्रा ने मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
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हलफनामा और परिसीमन: सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग ने राजस्थान उच्च न्यायालय में अपने-अपने हलफनामे प्रस्तुत कर दिए हैं। सीमा वृद्धि, पुनर्गठन और वार्डों के नए सिरे से परिसीमन का कार्य वर्ष 2026 की शुरुआत तक पूरा किया जा चुका है और वार्ड पुनर्गठन से जुड़ा फैसला कोर्ट में सरकार के पक्ष में आया है।
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'ट्रिपल टेस्ट' की अनिवार्यता: सुप्रीम कोर्ट के 2022 के ऐतिहासिक निर्देशानुसार, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग 'ट्रिपल टेस्ट' के आधार पर वार्ड-वार, निकाय-वार और पंचायत-वार ओबीसी आबादी का सटीक आंकड़ा जुटाकर सरकार को सौंपेगा, ताकि परीक्षण के बाद राजनीतिक आरक्षण की अधिसूचना जारी की जा सके।
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अगस्त तक आंकड़े मिलने की उम्मीद: मंत्री ने बताया कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने हाईकोर्ट को अवगत कराया है कि वह अगस्त माह में ओबीसी आबादी से जुड़े प्रमाणित आंकड़े सरकार को सौंप देगा। इसके एक सप्ताह के भीतर ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षण की स्थिति स्पष्ट कर अंतिम रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को सौंप दी जाएगी।
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चुनाव की तारीखें: चुनाव कराना राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है। सरकार आवश्यक डेटा और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए उत्तरदायी है और आयोग की मांग पर हरसंभव सहयोग तुरंत पूरा किया जाएगा।

