पारम्परिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार शुरू करे पुरस्कार योजना - गुप्ता
भरतपुर (विष्णु मित्तल) ईरान-अमेरिका युद्ध से अंतर्राष्ट्रीय तेज बाजार में अत्यंत अस्थिरता होने की वजह से भारत में बढ़ रहे पेट्रोल उत्पादों की निरंतर मूल्यवृद्धि के कारण महंगाई तेजी से बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं। ऐसी स्थिति में भारत को पेट्रोलियम उत्पादों की निर्भरता को कम करने के लिए पारम्परिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तेजी से कार्य करना होगा। इस सम्बन्ध में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर आग्रह किया है जो राज्य, शहर, गाँव, मोहल्ला या वार्ड सर्वाधिक पारम्परिक ऊर्जा स्रोत अर्थात् बायोगैस, सोलर सिस्टम, इंडक्शन चूल्हा का उपयोग करे उसे केंद्र सरकार प्रोत्साहन पुरस्कार देकर सम्मानित करे।
संस्था के निदेशक सीताराम गुप्ता द्वारा लिखे गये पत्र में सुझाव दिया है पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग से स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा प्राप्त होगी जिससे पर्यावरण संरक्षण में वृद्धि होगी तथा कच्चे तेल के आयात पर व्यय होने वाली राशि की बचत होगी। पत्र में सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर बायोगैस ग्राम अभियान जन आंदोलन की तरह चलाया जाये। जिसमें सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत 5 लाख, जिले को 2 लाख, राज्य को 11 लाख तथा राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट बायोगैस मॉडल वाले गाँव को 51 लाख रूपये का प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाये। बायोगैस की उपयोगिता से ग्रामीणों को निरन्तर गैस, बिजली सप्लाई व जैविक खाद मिलना शुरू हो जायेगा।
गुप्ता द्वारा लिखे गये पत्र में कहा है रूफटॉप सोलर मिशन के तहत शत प्रतिशत सोलर का उपयोग करने गाँव को प्रतिवर्ष एक लाख, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 51 हजार, तृतीय स्थान पर आने वाले को 31 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाये। जबकि सर्वाधिक रूफटॉप सोलर वाले शहर की कॉलोनी को 11 लाख व नगर निकाय को 51 हजार का पुरस्कार प्रदान किया जाये। इसी प्रकार इंडक्शन चूल्हा का सर्वाधिक उपयोग करने वाली ग्राम पंचायत को 5 लाख तथा शहर के वार्ड को 5 लाख रूपये की राशि पुरस्कार के रूप में प्रदान की जाये। ये सभी पुरस्कार महिलाओं को प्रदान किये जायें।
निदेशक द्वारा लिखे पत्र में सुझाव दिया है पारम्परिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार योजना शुरू की जाये। जिसमें प्रथम पुरस्कार 51 लाख, द्वितीय 31 लाख, तृतीय 21 लाख रुपये रखे जायें। राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार 11 लाख, द्वितीय 5 लाख, तृतीय 2 लाख एंव जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार 1 लाख, द्वितीय 51 हजार तथा तृतीय को 21 हजार रूपये की राशि प्रदान की जाये। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ ई-रिक्शा उपयोग करने वाले शहर को 11 लाख, ऊर्जा बचत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरकारी कार्यालय को 5 लाख, साइकिल उपयोग प्रोत्साहन के लिए जिला स्तर पर 2 लाख व ऊर्जा संरक्षण में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले विद्यालय व कॉलेज को एक लाख भी पुरस्कार दिया जाये। गुप्ता ने पत्र में यह भी सुझाव दिया है कि शत-प्रतिशत वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग करने के लिए भरतपुर को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित कर इसे देश का मॉडल जिला बनाया जाये।


