दावे बड़े-बड़े: एक तरफ चंबल का पानी लाने की कवायद, दूसरी तरफ 5 साल से खराब पड़ा हैंडपंप
चंबल योजना के बड़े-बड़े दावे, पर जमीनी हकीकत सिफर: खरखड़ा में 5 साल से हैंडपंप खराब, पानी को तरस रहे लोग
राजगढ़ (अलवर) अनिल गुप्ता
एक तरफ तो क्षेत्र में चंबल नदी से पानी लाने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं और प्रशासनिक कवायदें चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर धरातल पर बुनियादी पेयजल व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त पड़ी हैं। राजगढ़ कस्बे के टहला मार्ग स्थित खरखड़ा ग्राम के 'छतरी का बास' मोहल्ले में प्रशासनिक उपेक्षा का आलम यह है कि ग्रामीण पिछले कई सालों से बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर हैं।
मोहल्लेवासियों ने बताया कि यहां लगा एकमात्र सरकारी हैंडपंप पिछले पांच वर्षों से खराब पड़ा है। हद तो यह है कि नलों से पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था भी पिछले दस सालों से ठप पड़ी हुई है। स्थानीय लोगों को रोजाना अपनी दैनिक जरूरतों के लिए दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और श्रम दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
जलदाय विभाग को सौंपा ज्ञापन पेयजल संकट से परेशान ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियंता को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा जाहिर की है। ग्रामीण नरेंद्र सिंह, हरिकिशन सैनी, धीरज वर्मा, बाबूलाल और पप्पूराम सहित अन्य निवासियों का कहना है कि लंबे समय से शिकायत करने के बावजूद विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
जल्द राहत देने की मांग ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि कागजी दावों से इतर जमीनी हकीकत पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने बंद पड़े हैंडपंप को तुरंत दुरुस्त कराने और ठप पड़ी नल-जल योजना को पुन: चालू करने की गुहार लगाई है, ताकि लोगों को इस भीषण जल संकट से निजात मिल सके।

