घाट कैनाल के विकास के लिए करोड़ों रुपए खर्च, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा बूंद पानी
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों की जीवनदायिनी माने जाने वाली घाट कैनाल पिकअप वियर के विकास में सरकार की ओर से करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी क्षेत्र के किसानों को आज तक पानी नहीं मिला है। जिससे किसान हताश व निराश नजर आ रहे हैं।
कस्बे के किसानों के अनुसार लक्ष्मणगढ़ व कठूमर तहसील क्षेत्र सैकड़ों गांवों के किसानों को एक दर्जन से अधिक बांधों में पानी भरने वाली घाट कैनाल पिकअप वियर का तीन दशक से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। पूर्व में घाट कैनाल पिकअप वियर से लक्ष्मणगढ़ व कठूमर के दर्जनभर से अधिक गांवों के बांधों में पानी पहुंचता था, लेकिन बांधों में पानी पहुंचाने वाली नहरों पर अतिक्रमण व नहरों के क्षतिग्रस्त होने के चलते घाट कैनाल का पानी लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र को मिलना बंद हो गया है। घाट कैनाल में आने वाला पानी सीधा भरतपुर जाने लगा। सन 2012 में घाट कैनाल पिकअप वियर की मरम्मत व लक्ष्मणगढ़ के बांधों में पानी पहुंचाने वाली नहरों की मरम्मत व नवीनीकरण के लिए करीब 37 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत हुई थी। उसके बाद पिकअप वियर का नवीनीकरण व कुछ नहरों का निर्माण सिंचाई विभाग की ओर से करवाया गया था, लेकिन निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार व आधे अधूरे निर्माण के चलते घाट कैनाल का पानी लक्ष्मणगढ़ में पहुंचने की स्थिति नहीं बनी।
क्षेत्र के किसानो द्वारा बार-बार क्षेत्रीय प्रतिनिधियों का अवगत कराने के बाद भी क्षेत्रीय लोगों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाया है।
पूर्व में कांग्रेस सरकार में विधायक रहे जौहरीलाल मीणा की ओर से भी विधायक कोटे से करोडों की राशि से नहरों का निर्माण करवाया गया था, लेकिन फिर भी बरसात के सीजन में लक्ष्मणगढ़ के बांधों में पानी नहीं मिल पाया। करोड़ों खर्च होने के बावजूद पानी नहीं मिलने से क्षेत्र के किसान चुनाव में मुख्य मुद्दा मानते हुए प्रत्याशी इसका पूरा आश्वासन देते रहे हैं । लेकिन आज तक क्षेत्र के बांध में इसका पानी नहीं आया है । जबकि-
- लक्ष्मणगढ़ तहसील क्षेत्र घाट गांव स्थित कैनाल से भरतपुर व लक्ष्मणगढ़ को मिल रहा पानी
- नटनी के बारां से रूपारेल नदीं से आने वाला पानी घाट स्थित कैनाल में आकर रुकता है। यहां से एक मोरी के
- जरिए पानी लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र की मोरी से दर्जनों बांधों में पानी पहुंचता है। शेष पानी भरतपुर को निकल जाता है।
इस नहर से चंद्रा माइनर नहर से दो नहरों में बट जाता है पानी
घाट से चंद्रा का माइनर तक एक ही नहर में पानी पहुंचता है। यहां से नहर दो हिस्सों में बट जाती है। एक नहर जावली व दूसरी नहर मौजपुर व लक्ष्मणगढ़ के बांधों में पानी पहुंचाती है, लेकिन ये दोनों ही नहरे सूखी पड़ी रहती है।
लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र की जीवन दायिनी माने जाने वाली घाट केनाल में लक्ष्मणगढ़ पानी आवक मार्ग पर अतिक्रमण हो जाने से लोगों की आस टूट गई । किसान नेता असलम खान गंगा लहरी प्रजापत विक्रम सिंह मोहम्मद रफीक खान के गत वर्ष अथक प्रयासों व प्रशासन के सहयोग से घाट कैनाल पिकअप से चंद्रा माइनर तक अवरुद्ध पानी निकासी मार्ग को जेसीबी की मदद से हटाया गया था। लेकिन उसके बाद बरसात नहीं होने से बांध में पानी की आवक नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि घाट कैनाल पिकअप के गेट खुलने पर प्रशासन को सावचेत रहने की आवश्यकता है। अगर प्रशासन का सहयोग रहता है तो लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में बाध भरने की संभावनाएं प्रबल होती है।
पानी के लिए कई बार किया आंदोलन
लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के किसानों ने घाट कैनाल के पानी को लेकर कई बार आंदोलन किया, लेकिन काफी आंदोलन व विरोध प्रदर्शन तथा जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से समस्या के बारे में अवगत करवाने के बाद भी आज तक घाट कैनाल का पानी लक्ष्मणगढ़़ क्षेत्र के बांधों को नहीं मिला है।
दिनों दिन नीचे गिर रहा क्षेत्र का जलस्तर,
गंगा लहरी प्रजापत लक्ष्मणगढ का कहना है कि- बांधों में पानी नहीं पहुंचने के चलते कस्बा लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में दिनों दिन जलस्तर नीचे गिरता जा रहा है। बोरिंग भी दम तोड़ रही है। ऐसे में किसान खुद के भविष्य के लिए काफी चिंतित हैं।


