ग्रामीण सेवा शिविर में वर्षों पुरानी भूमि विवाद की समस्या का समाधान, 21 परिवारों को मिले आवासीय पट्टे
बावड़ी ( मिश्रीलाल लखारा) बावड़ी उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत मैलाणा में मंगलवार को ग्रामीण सेवा शिविर-2026 का आयोजन किया गया, जिसमें वर्षों से लंबित राजस्व एवं आवासीय पट्टों से जुड़े मामलों का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को बड़ी राहत प्रदान की गई। शिविर के दौरान संयुक्त खातेदारी वाली भूमि का आपसी सहमति से विभाजन कर वर्षों पुरानी समस्या का समाधान किया गया, वहीं 21 पात्र परिवारों को आवासीय पट्टे भी जारी किए गए।
शिविर में बाजाराम पुत्र बंगाराम जाट सहित अन्य सह-खातेदारों ने खाता संख्या 80, 81 एवं 82 की संयुक्त खातेदारी का आपसी सहमति से विभाजन करने का आवेदन प्रस्तुत किया। राजस्व अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सभी पक्षों की सहमति से भूमि विभाजन की प्रक्रिया पूर्ण की तथा प्रत्येक खातेदार के हिस्से की भूमि अलग दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी। इससे संयुक्त खातेदारी की वर्षों पुरानी समस्या समाप्त हो गई तथा भविष्य में भूमि विवाद की संभावना भी खत्म हो गई। साथ ही अलग-अलग खाता एवं लगान दर्ज कर राजस्व अभिलेखों को अद्यतन करने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की गई।
इसी शिविर में महेंद्रराम पुत्र हरदेवराम, पृथ्वीराज पुत्र बाबूलाल, किरणा पत्नी पुखाराम, चेनाराम पुत्र सहीराम सहित 21 पात्र व्यक्तियों को आवासीय पट्टे प्रदान किए गए। लाभार्थियों ने राज्य सरकार एवं प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिविर के माध्यम से उन्हें त्वरित और पारदर्शी सेवाओं का लाभ मिला।
शिविर प्रभारी एवं सहायक विकास अधिकारी रामलाल सोमराड़ तथा सह प्रभारी एवं भू-अभिलेख निरीक्षक भारत सिंह चौधरी के नेतृत्व में आयोजित शिविर में प्रशासक पिंकी हंसराज राव, ग्राम विकास अधिकारी अशोक बिश्नोई, उप सरपंच पदम सिंह मैलाणा, पीएचईडी विभाग के सहायक अभियंता देवेंद्र कुमार, विद्युत विभाग के सहायक अभियंता योगेश चौहान, पटवारी पूजा बिश्नोई, भागीरथ गोदारा, संयुक्त निदेशक पशुपालन डॉ. संजय व्यास, कृषि पर्यवेक्षक सुगनाराम गहलोत, सांख्यिकी विभाग के चेतन प्रकाश सैनी, प्रधानाचार्य प्रेमलता पटेल, कनिष्ठ सहायक मोती सिंह, आंगनबाड़ी सुपरवाइजर आशा सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित निस्तारण किया।
ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे शिविरों से वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान गांव में ही हो रहा है, जिससे लोगों का समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है।


