सुधा सागर गौशाला एवं पक्षी आश्रय का अवलोकन कर मुनि श्री सौम्य सागर ने की सराहना
घायल पक्षियों और गोवंश के सेवा कार्यों को देख मुनिराजों ने जताया हर्ष, अलवर की ओर बढ़ा विहार
रामगढ़/अलवर (अमित भारद्वाज) परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री सौम्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री निश्छल सागर जी महाराज का रामगढ़ से मंगल विहार होकर बगड़ तिराया स्थित 'सुधा सागर गौशाला एवं पक्षी आश्रय' में आगमन हुआ। गौशाला पहुँचने पर जैन समाज और गौशाला प्रबंधन द्वारा मुनि संघ की भव्य अगवानी की गई।
जैन समाज के प्रवक्ता एडवोकेट मोहित जैन ने बताया कि गौशाला आगमन के पश्चात दोनों मुनिराजों ने परिसर की व्यवस्थाओं का विस्तृत अवलोकन किया। मुनि श्री ने यहाँ निवासरत गोवंश के संरक्षण, उनके खान-पान, रहने के स्थान तथा चिकित्सा संबंधी प्रबंधों की गहनता से जानकारी ली।
- घायल पक्षियों के उपचार की सराहना
गौशाला परिसर में ही संचालित हो रहे पक्षी आश्रय का अवलोकन करते हुए मुनि श्री सौम्य सागर जी महाराज ने घायल, असहाय और निराश्रित पक्षियों के इलाज और संरक्षण की व्यवस्थाओं को देखा। इस अनूठे सेवा कार्य से मुनिराज अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने इस पावन कार्य को जैन धर्म के मूल सिद्धांत 'अहिंसा' और 'जीव-दया' की उत्कृष्ट साधना बताते हुए कहा कि मूक पशु-पक्षियों की सेवा ही सच्ची मानवता है और यह कार्य संपूर्ण समाज के लिए अनुकरणीय है। मुनि श्री ने इस सेवा प्रकल्प को और अधिक सुदृढ़ व विस्तृत बनाने के लिए कमेटी को आवश्यक दिशा-निर्देश एवं मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
- प्रबंधन ने लिया आशीर्वाद, अलवर में चातुर्मास प्रस्तावित
इस अवसर पर गौशाला प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों ने परम पूज्य मुनिराजों के पाद-प्रक्षालन (चरण धोने) का सौभाग्य प्राप्त किया और आरती उतारकर मंगल आशीर्वाद लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रातः 5:30 बजे सुधा सागर गौशाला से मंगल विहार करते हुए मुनि संघ का अलवर के सूर्य नगर स्थित जैन मंदिर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मुनि श्री का आगामी चातुर्मास अलवर शहर में होना प्रस्तावित है, जिसे लेकर स्थानीय जैन समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है।


