आदिबद्री व कनकाचल पर्वत को बचाने के लिए प्राणों को निछावर कर देने का लिया संकल्प

आदिबद्री और कंकाचल पर्वतों को संरक्षित नहीं किया गया तो 2 मार्च को साधु संत संबंधित मंत्रियों के आवासों पर देंगे धरना

Feb 27, 2022 - 14:13
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आदिबद्री व कनकाचल पर्वत को बचाने के लिए प्राणों को निछावर कर देने का लिया संकल्प
फोटो- ड़ीग के आदिबद्री में पर्वतों की रक्षा में प्राण न्योछावर करने संकल्प लेते हुए साधु संत

ड़ीग (भरतपुर, राजस्थान/ पदम जैन) आदिबद्री व कनकाचल पर्वत पर हो रहे विनाशकारी खनन के विरोध में जारी धरने के 407 वे दिन शनिवार को पर्वत के रक्षण व खनन के खिलाफ निकाली जा रही 14 कोसीय आदिबद्री पर्वत की परिक्रमा अपने अंतिम पड़ाव स्थल आदिबद्री धाम पहुंची। जहां साधु संतों ने भगवान आदि बद्री की विधिवत पूजा अर्चना कर आदि बद्री और कंका चल पर्वत सहित द्वापर कालीन सभी धरोहरों की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने का संकल्प लिया।
 शनिवार की सुबह सभी पद यात्री केदारनाथ भगवान के दर्शन करके बिलोन्द, खूंटपुरी, धाऊ बरौली, पसोपा गांव से होती हुई ब्रज के परम आराध्य पर्वत आदिबद्री व कनकाचल को बचाने की अपील व गुहार लगाते हुए अंतिम पड़ाव स्थल आदिबद्रीधाम पहुंची जहां बड़ी संख्या में ग्रामवासियों व ब्रजवासीयों एवं साधु संतों ने  दोनों पर्वतों को मुक्त करने के लिए आखरी दम तक लड़ने की कसम खाई । 
जड़खोर के महंत व गुर्जर समाज के प्रमुख सन्यासी भूरा बाबा ने मुख्यमंत्री को संदेश देते हुए कहा कि सभी संतो का उन पर पूरा भरोसा था कि वह अविलंब दोनों पर्वतों को खनन मुक्त करेंगे लेकिन ऐसा लगता है कि खनन माफिया ने तो मुख्यमंत्री के अलावा पूरी सरकार को ही प्रभावित कर रखा है । साथ ही ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझकर साधु संतों व ब्रावासियों को अंधकार में रखकर दोनों पर्वतों को वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में ढिलाई की जा रही है। जबकि खनन माफिया दिन रात भीषण खनन कर  पुलिस व प्रशासन के सहयोग से  पर्वतों को नष्ट करने में लगा है। ऐसे में अब हमारे पास दोनों पर्वतों के रक्षण के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने के अलावा ओर  रास्ता नहीं बचा है । आदिबद्री महंत शिवराम दास ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है की सरकार कामां विधायक व मंत्री जाहिदा खान के दबाव में मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद भी दोनों पर्वतों के संरक्षण करने में रुचि नहीं दिखा रही है।  साथ ही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि अनैतिक रूप से दोनों पर्वतों पर खनन जारी रखने के लिए रुपयों का बढ़ा लेन-देन भी हुआ है ।
 संरक्षण समिति के महासचिव ब्रजदास ने पसोपा गांव में आयोजित सभा में बोलते हुए   कहा कि यदि शीघ्र दोनों पर्वतों को संरक्षित नहीं किया गया तो साधु संत 2 मार्च को जयपुर पहुंचकर और संबंधित मंत्रियों के यहां कीर्तन भजन करते हुए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।   
आदिबद्री में आयोजित सभा   को संबोधित करते हुए राधाकांत शास्त्री ने संबंधित मंत्रियों पर खनन माफियाओं के प्रभाव में होने का आरोप लगाया एवं कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत संवेदनशील है लेकिन उनको अंधेरे में रखकर मंत्री व अधिकारी खनन माफियाओं के हाथ की कठपुतली बने हुए है जिस कारण से मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी दोनों पर्वतों को अभी तक वन क्षेत्र में स्थानांतरित करके खनन मुक्त नहीं किया गया है। इस अवसर पर सैकड़ों ब्रजवासी साधु-संतों व 20 गांवों के प्रमुख लोगों के अलावा मुख्य रूप से हरिबोल बाबा, मुकेश शर्मा, सरपंच सुल्तान सिंह, जलाल खान फौजी, कृष्णचैतन्य बाबा, साध्वी आराधना, साध्वी ललिता, हनुमान बाबा, नारायण बाबा आदि मोजूद थे।

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