आजादी के बाद से संचालित विद्यालय की हवेली अब होगी खाली: अभिभावकों को बच्चा की सुरक्षा की चिंता
शिक्षा की नींव व ऐतिहासिक विरासत 'भैरू वाली स्कूल' के मर्ज पर जताया विरोध
खैरथल (हीरालाल भूरानी ) शहर की पुरानी आबादी में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, जिसे स्थानीय लोग प्रेमपूर्वक 'भैरू वाली स्कूल' कहते हैं, अब अपने ऐतिहासिक भवन से स्थानांतरित होने जा रहा है। यह खैरथल का प्रथम सरकारी स्कूल बताया जाता है। करीब 90 बच्चों के नामांकन वाले इस विद्या मेंलय को शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भवन में मर्ज किया जा रहा है। इस निर्णय से क्षेत्रवासियों, अभिभावकों और भूतपूर्व विद्यार्थियों में गहरी नाराजगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल के कारण पुरानी आबादी में हमेशा चहल-पहल बनी रहती थी। अब यदि यह हवेलीनुमा भवन खाली हो गया, तो धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो जाएगा । अभिभावकों की मुख्य चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। उन्होंने कहा कि नए स्थान पर लगातार वाहन चलते हैं, जिससे छोटे बच्चों को स्कूल भेजना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि विद्यालय को यथास्थान ही संचालित रखा जाए।
भैरू प्रसाद से 'भैरू वाली स्कूल' तक सफरः - यह विद्यालय आजादी के बाद से संचालित है। पहले प्रधानाध्यापक भैरू प्रसाद शर्मा के नाम पर ही इसका नाम "भैरू वाली - स्कूल" पड़ा। उनका विद्यार्थियों से आत्मीय संबंध ऐसा था कि 15 किलोमीटर दूर तक के गांवों से बच्चे पैदल पढ़ने आते थे। उस समय शिक्षा को सेवा और गुरु को पालनहार माना जाता था। विद्यालय की इमारत एक प्राचीन हवेली है जहां विशाल आंगन, मजबूत लकड़ी के दरवाजे, हवादार कमरे और तहखाना जो आज भी एक विरासत के रूप में मौजूद है। यहां पढ़े छात्र आज भी सोशल मीडिया पर स्कूल की तस्वीरें शेयर कर अपनी यादें ताजा करते हैं।
इन नामचीन शख्सियतों की शुरुआत यहीं से हुईः इस विद्यालय ने शिक्षा, समाज और पत्रकारिता सहित कई क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ने वाले विद्यार्थी दिए हैं। मसलन डॉ. जितेन्द्र लोढ़ा, राजस्थान के प्रसिद्ध टीचर एजुकेटर, लेखक व कवि के साथ अनेक पुस्तकों के लेखक महेश झालानी, पत्रकार हीरालाल भूरानी इसके अलावा तहसीलदार भीम सिंह यादव, शिक्षाविद जेठानंद कल्ला, प्राचार्य मदन लाल उपाध्याय, वाणिज्य व्याख्याता दीपचंद लोढ़ा, इंजीनियर महेश कल्ला, दिलीप आचार्य, समाजसेवी डा. ओमप्रकाश मांधु जैसे अनेक वैश्य समाज के सेठ व नेक विभूतिया इसी विद्यालय की देन है। इन सभी विभूतियों ने कभी इसी विद्यालय से शिक्षा की नींव रखी थी और आगे चलकर राज्य व देश स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
भविष्य की मांगः विरासत बचे, बच्चों की सुरक्षा बनी रहे - स्थानीय निवासियों और पूर्व विद्यार्थियों की मांग है कि इतिहास, विरासत और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस विद्यालय को इसके वर्तमान भवन में ही पुनः संचालित किया जाए। इस स्कूल की दीवारें केवल ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि खैरथल की शैक्षिक परंपरा, भावनाएँ और स्मृतियों की गवाही देती हैं।