कृषि आदान विक्रेताओं का एक वर्षीय डिप्लोमा के दो बैच दी दीक्षांत समारोह
आदान विक्रेता किसान व कृषि विभाग के बीच कडी - संयुक्त निदेशक
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) कृषि आदान विक्रेताओं का एक वर्षीय डीएईएसआई के दो बैचों का दीक्षान्त समारोह कृषि विभाग के जिला स्तरीय आत्मा कार्यालय के सभागार में सम्पन्न हुआ।
राज्य कृषि प्रबंध संस्थान, दुर्गापुरा, जयपुर के माध्यम से नोडल प्रशिक्षण संस्थान कार्यालय उप निदेशक कृषि एवं पदेन परियोजना निदेशक (आत्मा) पर जिले के आदान विक्रेताओं को संचालित देसी डिप्लोमा कार्यक्रम के द्वितीय एवं तृतीय बैच के दीक्षान्त समारोह का आयोजन दो पारियों किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुरेश चन्द गुप्ता, संयुक्त निदेशक कृषि ने कहा कि आदान विक्रेता किसानों को उचित दर पर मिट्टी जॉच के अनुसार आवश्यक मात्रा में ही आदान बेचने चाहिए, जिससे किसानों की लागत कम होगी और लाभ अधिक होगा। आदान विक्रेता कृषि विभाग और किसान के बीच की कड़ी है इसलिए इन्हें पूरी ईमानदारी व नैतिक मूल्यों के साथ खेती में टिकाऊपन लाने हेतु अहम भूमिका निभानी चाहिए।
कार्यक्रम की जिला स्तरीय नोडल अधिकारी परियोजना निदेशक (आत्मा) श्रीमती तुलसी सैनी ने आदान विक्रेताओं से कहा कि वे इस कार्य को व्यापार के रूप में न लेकर मानव कल्याण, प्रकृति संरक्षण एवं खेती को आने वाले समय में शतत् बनाये रखने के लिए करें। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षणों भाग लेकर कृषि तकनीक में ज्ञान वृद्धि कर कृषि आदानों की जानकारी, संस्तुत मात्रा, समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन जैसी जानकारी होना अति आवश्यक है। जिससे किसानों को इसका लाभ मिल सके।
उप परियोजना निदेशक (आत्मा) अमर सिंह ने बताया कि कृषि आदान विक्रेता बिना राटीक जानकारी के अभाव में अपने फायदे के लिए किसानों को अनावश्यक एवं अनुपयोगी कृषि आदान बेच देता है। जिससे प्राकृतिक पर्यावरण, लाभकारी सूक्ष्म जीवों एवं शुद्ध खाद्यान में असंतुलन हो रहा है। जिसका प्रभाव सीधा जीव जगत पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह चलता रहा तो एक दिन धरती माँ बॉझ हो जायेगी। दुनिया चाहे कितनी भी विकसित हो जाये लेकिन खाद्यान तो खेती किसानी से पैदा होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में अन्य कोई ऐसा आविष्कार या संशाधन नहीं है, जिससे खेती सम्भव हो। कृषि विभाग एवं इससे सम्बन्धित सभी आयाम को शक्तिशाली, संशक्त, नवाचारी एवं किसानों की आमदनी को दोगुनी करने वारते विभाग में जो कमजोरी है उन्हें भविष्य में दूर करना चाहिए।
परियोजना निदेशक ने बताया कि डिप्लोमा 48 सप्ताह (प्रत्येक रविवार) का होता है जिसमें 40 कक्षाएँ व 08 कृषि तकनीकी भ्रमण करवाये जाते है। जिसका सफलतापूर्वक आयोजन उपरान्त आज प्रमाण पत्रो का वितरण किया गया। दीक्षान्त समारोह में दोनों बैच के फैसिसिलिटेर ओंकार सिंह सेवानिवृत कृषि अनुसंधान अधिकारी व डॉ. लक्ष्मण सिंह सेवानिवृत कृषि अनुसंधान अधिकारी, रूपेन्द्र मीणा, कृषि अधिकारी (मिशन), धर्मेन्द्र तिवारी कृषि अधिकारी सहित सम्बन्धित उपस्थित रहे।

