खाटूश्याम धाम को दण्डवत यात्रा को निकला श्याम बाबा का भक्त
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय)
भरतपुर जिले के कस्बा रूपवास से खाटूश्यम (सीकर) तक एक साथ 11 नारियल की 11 दण्डवत दे रहे 62 वर्षीय श्याम बाबा भगत केदार कटारा 647 दिन का सफर तय करने के बाद करीब 191किमी दूरी तय कर दौसा जयपुर जिले की सीमा पहुंचे,जहां क्षेत्र के श्याम प्रेमियों ने दण्डवत दे रहे यात्री का स्वागत किया और रथ में विराजमान श्री खाटूश्याम बाबा की पूजा -अर्चना कर विश्वशान्ति,राष्ट्र का उत्थान, मानव कल्याण और वन सम्प्रदा ,मूक बधिर प्राणियों की रक्षा की कामनाए की। श्याम भक्त केदार कटारा ने ये यात्रा 24 अक्टूम्बर 2023 को रूपवास के श्री चिन्ता हरण हनुमान मन्दिर से प्रारम्भ की और यात्रा सात साल के बाद अक्टूम्बर 2030 को पूरी होगी। ये प्रतिदिन 300 - 400 मीटर का सफर तय कर करीब 21-22 सौ दण्डवत देते है। कस्बा रूपवास से खाटूश्याम वाया दौसा-जयपुर तक करीब 350 किमी दूरी की दण्डवत यात्रा पूरी कर करीब 17 लाख 65 हजार 551 दण्डवत देंगे और अब तक करीब 191 किमी दूरी में करीब 8 लाख 51 हजार 786 दण्डवत दे चुके है। शेष रही करीब 160 किमी दूरी करने में छह वर्ष लगेंगे और करीब 7 लाख 81 हजार 786 दण्डवत देनी होगी।
- दण्डवत यात्रा का उद्देश्य
दण्डवत यात्रा दे रहे श्याम बाबा भगत केदार कटारा ने बताया कि दण्डवत यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्मतएव हिन्दु धर्म के देवी-देवताओं का प्रचार-प्रचार करना,देश व समाज की सेवा के प्रति लोगों को जागरूक करना, वन सम्प्रदा व गौवंश की रक्षा करना,विश्वशान्ति,मानव व परिवार कल्याण,राष्ट्र का उत्थान,महिला सशक्तिकरण,ब्रज संस्कृति सहित भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना,स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति आमजन को जागरूक करना,सरकार की योजनाओं का प्रचार करना,देश व समाज में भाईचारा व प्रेम कायम कराना आदि। साथ ही प्रतिदिन श्याम बाबा की कीर्तन,प्रवचन,हवन,महाआरती आदि धार्मिक कार्यक्रम करना और एक गांव में 11 परिवार को श्याम बाबा से जोडना।
- 21 लाख दण्डवत का लक्ष्य
दण्डवत यात्री केदार कटारा ने बताया कि उनका लक्ष्य है कि जीवन में 21 लाख दण्डवत देने का पहले चरण में करीब सवा लाख दण्डवत दे चुका और अब 2023 से 2030 तक करीब 17 लाख 50 हजार दण्डवत दे दूंगा। गुजरे तीन दशक में रूपवास से खाटूश्याम तक 21 पदयात्रा एवं एक दण्डवत यात्रा पूरी कर चुका। साथ ही 84 कोसीय ब्रज की 11,वृन्दावन की पंच कोसीय 51,गोर्वधन की 101 तथा रूपवास से केदारनाथ, बद्रीनाथ,हरिद्वार, नीलकण्ठ, रामेश्वरधाम,जगन्नाथपुरी,अयोध्या,बनारस,इलाहाबाद आदि की एक-एक पदयात्रा हो गई।


