टुण्डपुरा में 5 करोड मंत्र की आहुतियां पूर्ण :आस्था से भरपूर है गुरूमाया आश्रम
वैर भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय) उपखंड वैर की ग्राम पंचायत जगजीवनपुर के गांव टुण्डपुरा की धरा पर मीणा समाज में जन्मे रंगली भगत जी महाराज ने गांव टुण्डपुरा में मानव व मूक बधिर प्राणियों की सेवा,सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार तथा पर्यावरण की शुद्वता के लिए साल 1956 में गुरूमाया आश्रम और यज्ञशाला का निर्माण कराया और नित्य 24 घन्टे भूखे को भोजन,जलपान,21 सौ वेदमन्त्रों की आहुतियां आदि धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम की शुरूआत की,जो आज भी जारी है। सन्त बालकदास महाराज,साधू बाबा व परशराम भगत के सानिध्यं में आश्रम पर साल में चार बार राष्ट्रीय स्तरीय सन्त समागम,दर्शन,भण्डारा तथा प्रत्येक माह की पूर्णिमासी को लघु भण्डारे का आयोजन होता है। ये आश्रम अब आस्था से भरपूर है,जहां देशभर से भारी सख्या में सन्त समाज व श्रद्वालु भाग लेते है,जिनकी मनोकामनाए पूर्ण होने पर सभी कार्यक्रम में भागेदारी अदा कर परिवार सहित शामिल होते है। आश्रम के सेवक लखनलाल मीणा एवं सन्तोष बाबा ने बताया कि सिद्व पुरूष रंगली भगत महाराज ने साल 1956 में गांव टुण्डपुरा में गुरूमाया आश्रम व यज्ञशाला की स्थापना करते हुए देश,गौवंश,मानव,समाज,मूक बधिर प्राणियों की सेवा शुरू की और पर्यावरण की शुद्वता,मानव कल्याण,विश्वशान्ति,देश-प्रदेश की खुशहाली आदि के लिए यज्ञ की शुरूआत की,यज्ञ में प्रतिदिन 21 सौ वेदमन्त्रों की आहुतियां दी जाने लगी। श्री गुरूमाया भक्त मण्डल के द्वारा साल 1956 से आज तक 70 साल,25 हजार 550 दिन में करीब 5 करोड 36 लाख 55 हजार आहुंतियां पूर्ण हो गई और 901 रामायण के पाठ,7 हजार सुन्दरकाण्ड पाठ,11 हजार 111 हनुमान चालीसा आदि पूर्ण हो गए। उन्होने बताया कि साल में गंगादशहरा एवं कार्तिक दशहरा पर सन्त समागम,सन्त विदाई व विशाल भण्डारा तथा सिद्व पुरूष रंगली भगत की जयन्ती व पुण्यतिथि साल 2016 से आज तक सन्त बालकदास महाराज,साधू बाबा व परशराम भगत के सानिध्यं में सन्त दर्शन,प्रचवन,भण्डारा तथा प्रत्येक माह की पूर्णिमासी पर भण्डारा आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।


