चंद्रशेखर शास्त्री अपनी पुत्री मोहिनी को सेठ माया दास के संरक्षण में देकर तपस्या के लिए गए

Oct 7, 2025 - 12:05
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चंद्रशेखर शास्त्री अपनी पुत्री मोहिनी को सेठ माया दास के  संरक्षण में देकर तपस्या के लिए गए

खैरथल (हीरालाल भूरानी) 
            राज ऋषि  अभय समाज के विशाल रंगमंच पर महान सामाजिक ऐतिहासिक एवं धार्मिक नाटक महाराज भरतरी हरी देखने के लिए बड़ी श्रद्धा पूर्वक दूर-दूर से उत्साह पूर्वक   दर्शक आ रहे हैं ।
         इस नाटक में नीति शतक के अंतर्गत सेठ माया दास अपने फायदे के लिए अपने मित्र चंद्रशेखर शास्त्री को तपस्या करने के लिए भेजते हैं और कहते हैं कि तुम तो तपस्या करने जाओ तुम्हारी पुत्री को मैं  कण्व की तरह  paluga और फिर चंद्रशेखर शास्त्री के जाने के पश्चात माया दास मोहिनी को एक नृत्य की बनने पर मजबूर कर देता है ।
          अभय समाज अलवर के प्रचार-प्रसार मंत्री अमृत खत्री ने बताया कि आगे चंद्रशेखर शास्त्री  घोर तपस्या करके अमर फल प्राप्त करते हैं और वह राजा भरतरी हरी को अमर फल  आकार देते हैं और कहते हैं कि राजन यह अमर फल आप ही इसका भोग लगाए ताकि अपरिमित  काल तक जीवित रहकर आप प्रजा की सेवा कर सके ।
      इस नाटक का निर्देशन संस्था के युवा यशस्वी महानिदेशक मनोज कुमार गोयल द्वारा किया जा रहा है संस्था के अध्यक्ष पंडित धर्मवीर जी शर्मा के उचित मार्गदर्शन में यह नाटक निरंतर 15 दिन तक चल रहा है और  दर्शक बड़ी श्रद्धापूर्वक इसको देखने के लिए आते हैं ।
          संस्था के महामंत्री राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस नाटक में मधुर संगीत संस्था के संगीत निर्देशक जितेंद्र गुप्ता के निर्देशन में महेश चंद शर्मा प्रेम सिंह राठौड़ जसवंत  सैनी  एवं कुमारी भारतीआदि सभी मधुर गीतों की प्रस्तुति दे रहे हैं ।

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