मौसम परिवर्तन-रखें विशेष सावधानी: बच्चे, वृद्धजन, गर्भवती महिलाएं एवं को-मोर्बिडिटी वाले व्यक्तियों का रखें ध्यान- कपूर
भरतपुर ( कौशलेंद्र दत्तात्रेय)। बरसात का मौसम खत्म होते ही हल्की सर्दी या मौसम परिवर्तन होने के कारण खांसी, बुखार, जुकाम व गला खराब आदि लक्षणों के रोगियों की संख्या में वृद्धि हो जाती है। हल्की सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम व गला खराब के रोगी चिकित्सक की सलाह समय पर लेते हैं तो रोग के नियंत्रण पर प्रभावी व तत्काल काबू पाया जा सकता है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गौरव कपूर ने बताया कि हल्की सर्दी या मौसम परिवर्तन के समय विशेष सतर्कता एवं सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। इस मौसम में बच्चे, वृद्धजन, गर्भवती महिलाएं एवं को-मोर्बिडिटी वाले व्यक्तियों यथा डायबिटीज, कैंसर, हृदय रोग व अन्य गंभीर बीमारियों के रोगियों को सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम व गला खराब के लक्षण की स्थिति में सतर्क रहने व विशेष ध्यान रखते हुए तुरन्त चिकित्सक के अनुसार जांच व उपचार करवाये जाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि उनमें रोग के गम्भीर होने की ज्यादा सम्भावना रहती है। उन्होंने बताया कि चिकित्सक के परीक्षण उपरान्त रोगियों में सामान्य सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम व गला खराब के लक्षण की स्थिति में होम आईसोलेशन एवं उक्त लक्षणों के गम्भीर या लम्बी अवधि होने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी जाती है। ऐसे रोगियों जिन्हें सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम व गला खराब की तकलीफ है, उन्हें दूसरे लोगों से दूरी बनानी चाहिए और मास्क का उपयोग करना चाहिए एवं हाथों को आवश्यकतानुसार साबुन से धोना या सेनेटाईजर का उपयोग करना चाहिए।
रखें विशेष सावधानी
डॉ. कपूर ने बताया कि इस मौसम में बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हल्की सर्दी के मौसम में अपने और अपने बच्चों का ध्यान घर पर रखने के लिए आपको खास सावधानियाँ बरतनी चाहिए। इसके लिए गर्म कपड़े, संतुलित आहार, स्वच्छता और हल्की-फुल्की गतिविधियाँ बहुत जरूरी हैं। हल्के गर्म कपड़े पहनाएं सिर, हाथ और पैर ढककर रखें ताकि शरीर की गर्मी सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार मौसमी फल-सब्जियाँ सूप, दलिया, उबले अंडे, और हल्दी वाला दूध दें। नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने की आदत डालें और साफ-सुथरे परिवेश में रखें, हल्की एक्सरसाइज या योग एवं ताजी हवा में थोड़ी देर टहलें, ताकि बच्चे सक्रिय रहें। छींक या खाँसी करते समय मुंह ढकना सिखाएँ, ताकि संक्रमण न फैले। अगर बच्चों को तेज़ बुखार, लगातार खाँसी या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें एवं समय-समय पर स्वास्थ्य जांच भी करवाते रहें। इन छोटे-छोटे उपायों से आप सर्दी के मौसम में अपने परिवार और बच्चों को घर पर सुरक्षित और स्वस्थ रख सकते हैं।


