टिटपुरी के बेनामी संत आश्रम पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाया
कठूमर (दिनेश लेखी) टिटपुरी मुख्यालय पर स्थित बेनामी संत आश्रम पर चल रही सात दिवसीय भागवत कथा में बुधवार को छठवें दिन उद्धव गोपी प्रसंग , कंश वध , जरासंध युद्ध, रुकमणि विवाह के प्रसंगो का वर्णन किया। इस दौरान श्रीकृष्ण- रुक्मिणी विवाह प्रसंग में श्रोता भक्त बाराती बनकर झूम उठे।
इस मौके पर व्यास राष्ट्रीय क्रांति दल के महाराज श्री गंगागीरी महाराज ने अपने मुखारविद से उद्धव गोपी प्रसंग में गोपियों के निष्काम प्रेम का वर्णन किया, जिसे सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथा में बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने बड़े होने पर कंस का वध कर अपने माता-पिता देवकी और वासुदेव को कारागार से मुक्त कराया। कंस वध से क्रोधित उसके ससुर मगध नरेश जरासंध ने श्रीकृष्ण से प्रतिशोध लेने के लिए मथुरा पर सत्रह बार आक्रमण किया। प्रत्येक बार भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने उसे पराजित किया, लेकिन उसका वध नहीं किया।
बेनामी संत आश्रम के महंत श्री शिवचेतन महाराज ने बताया कि महिलाओं ने श्रीमद् भागवत कथा में प्रसंग कृष्ण और रूक्मणी के विवाह पर बढ़चढ़ कर भाग लिया।

