बेखौफ माफिया: कहीं ढहा रहे मकान, कहीं कुचल रहे बेजुबान:पहाड़ियों का सीना छलनी, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
राजगढ़ (अलवर) अनिल गुप्ता
राजगढ़ उपखंड के मूनपुर गांव में इन दिनों कानून का खौफ नहीं, बल्कि खनन माफियाओं का 'सिक्का' चल रहा है। बालाजी मंदिर के समीप स्थित पहाड़ियों को अवैध रूप से काटकर पत्थरों की तस्करी की जा रही है। आलम यह है कि सूरज की पहली किरण के साथ ही माफियाओं की मशीनें और मजदूर सक्रिय हो जाते हैं, जिससे अरावली की सुंदर पहाड़ियां अब मलबे के ढेर में तब्दील होने लगी हैं।
चेकपोस्ट के सामने से गुजरती 'मौत'
हैरानी की बात यह है कि माचाड़ी तिराहे और रैणी के भूडा तिराहे जैसे मुख्य मार्गों से अवैध बजरी और पत्थरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिन-रात गुजर रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग और पुलिस की नाक के नीचे से यह काला कारोबार संचालित हो रहा है, लेकिन अधिकारी अपनी आँखें मूंदे बैठे हैं।
दहशत में ग्रामीण: बेजुबानों की मौत, मकानों को नुकसान
हाल ही में बारां का बास क्षेत्र में माफियाओं के दुस्साहस की एक डरावनी तस्वीर देखने को मिली। पुलिस द्वारा पीछा किए जाने पर माफियाओं ने ट्रैक्टर को इतनी लापरवाही से दौड़ाया कि एक मकान का डंडा (छज्जा) ढह गया। इस दौरान तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से तीन बकरियों की दर्दनाक मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि ओवरलोड वाहनों की वजह से सड़कें तो खराब हो ही रही हैं, साथ ही कभी भी कोई बड़ी मानवीय जनहानि हो सकती है।
"अवैध खनन से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि ओवरलोड वाहनों के कारण हमारे बच्चों का सड़क पर निकलना दूभर हो गया है। प्रशासन को लिखित शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।" — एक स्थानीय निवासी
सरकारी दावों की खुली पोल
एक ओर राज्य सरकार और जिला प्रशासन अवैध खनन पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का ढिंढोरा पीट रहे हैं, वहीं राजगढ़ की जमीनी हकीकत इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रही है। पहाड़ियों का लगातार कम होना भविष्य में बड़े पर्यावरणीय संकट की ओर इशारा कर रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि:-
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आखिर किसकी शह पर मूनपुर में बेखौफ चल रहा है खनन?
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क्या जान-माल के नुकसान के बाद भी प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
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क्या खनन विभाग और स्थानीय पुलिस इन माफियाओं पर नकेल कसने की हिम्मत जुटा पाएगी?

