कोटडी ( लुहारवास ) मे माता सती सत्यवान देवस्थान का जीर्णोद्धार प्रारंभ

समाजसेवी मुरारी लाल सोनी द्वारा ग्राम धरोहरों के संरक्षण में एक और सराहनीय पहल

Nov 4, 2025 - 13:13
Nov 4, 2025 - 13:29
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कोटडी ( लुहारवास ) मे माता सती सत्यवान देवस्थान का जीर्णोद्धार प्रारंभ

सीकर (सुमेर सिंह राव) सीकर जिले के खंडेला तहसील के अंतर्गत कोटडी लुहारवास मैं माता सती सत्यवान देवस्थान का जीर्णोद्धार प्रारंभ हो चुका है l समाजसेवी मुरारी लाल सोनी द्वारा ग्राम धरोहरों के संरक्षण में यह एक सराहनीय पहल मानी जा रही है l ग्राम कोटड़ी लुहारवास स्थित प्राचीन माता सती एवं सत्यवान देवस्थान जिसे स्थानीय जन सती माता मंदिर के नाम से जानते हैं का जीर्णोद्धार कार्य धूमधाम और श्रद्धा के साथ प्रारंभ हुआ l वर्षों से लोगों की आस्था और ग्रामीण संस्कृति का यह केंद्र अब नया रूप लेने जा रहा है l इस नव निर्माण की पहल ग्राम के गौरव समाजसेवी एवं प्रवासी उद्योगपति मुरारीलाल सोनी निवासी ग्राम कोटड़ी वर्तमान मुंबई द्वारा की गई है l जिसमें स्थानीय ग्रामीणों का भी सराहनीय योगदान है l मंदिर परिसर में कमरों का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है और शीघ्र ही मुख्य द्वार एवं शेष संरचनाओं का कार्य प्रारंभ होगा   l 

लोक कथा -  त्याग, साहस और धर्म का प्रतीक
ग्रामीण परंपराओं के अनुसार यह स्थल एक भावनात्मक एवं प्रेरक घटना का साक्षी है l कहा जाता है कि वर्षों पहले एक साहसी घुड़सवार सत्यवान इसी मार्ग से गुजर रहे थे तभी उन्होंने देखा कि एक महिला सर पर टोकरी रखकर जा रही है lअचानक घोड़े से उसका ध्यान उस  टोकरी में चलती फिरती  चमकती हुई वस्तुओं पर गया ध्यान से देखने पर पता चला की टोकरी में सांप है l घुड़सवार तुरंत रुके और महिला को सावधान करते हुए कहा सुनो टोकरी में सांप है संभाल कर रखो सांप का नाम सुनते ही महिला भयभीत हो गई l उसके हाथ कांप उठे और टोकरी जमीन पर गिर गई lसांप उछलकर घोड़े पर चढ़ गया और घुड़सवार को डस लिया l कुछ ही पलों में सत्यवान ने वहीं प्राण त्याग दिए लोगों का विश्वास है कि ईश्वर ने उनके इस त्याग, समर्पण और स्वभाव को मान दिया l और तभी से यह स्थल माता सती सत्यवान का दिव्य स्मृति और आस्था का केंद्र बन गया है l यह कथा हम दूसरों के लिए जीने और निस्वार्थ भाव से कार्य करने की प्रेरणा देती है l

  • परंपरा ,आस्था और सकारात्मक 

ग्राम कोटडी के सुपुत्र मुरारी लाल सोनी लगातार ग्रामीण मंदिरों व देवस्थान के जीर्णोद्धार धार्मिक सांस्कृतिक स्थलों के विकास और गांव की परंपरा व संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं l उनका प्रयास केवल मंदिर निर्माण नहीं बल्कि गांव की धरोहर इतिहास और सांस्कृतिक भावना का अभियान हैl ग्रामीणों ने उनके इस निस्वार्थ कार्य की भूरी भूरी प्रशंसा की है l

  • आस्था और विकास का संगम 

यह जीर्णोद्धार केवल निर्माण नहीं आस्था, संस्कृति ,इतिहास और समाज सेवा का पुनर्जागरण है l

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