बढते दाम कमरतोड महंगाई ने आमजन का जीना किया दुष्वार

May 30, 2026 - 12:25
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बढते दाम कमरतोड महंगाई ने आमजन का जीना किया दुष्वार

 राजगढ (अलवर/अनिल गुप्ता) तेल दाम नाँन स्टाप दोड रहे हैं। मोदी सरकार अपना खजाना आमजनता की लूट से भरकर अमीरों को लुटा रही हैं। भाकपा के सचिव एडवोकेट मनोज बोहरा ने कहा की देश में क्रूड आयल सस्ते दामों पर आता था, तब सरकार के अपना टैक्स बढा कर अपना खजाना भरना जारी रखा। परन्तु जनता को सस्ता क्रुड आयल आयात करने पर भी उसका लाभ नहीं दिया।बल्कि अमीरों के लाखों करोड़ रुपए के लोन माफ कर दिए,
 जब मोदी जी 2014 मे देश की बागडोर संभाली तब क्रूड आयल के दाम 108डालर का एक बैरल था, उस समय डीजल पट्रोल के दाम 55-60रू प्रति लीटर था।आज अगर मान भी लिया जावे कि क्रूड आयल का दाम 108डालर का हैतो डीजल पट्रोल के दाम लगभग दुगुना होने की तैयारी में है क्यों?
 उन्होने कहा की बड़ी बात यह हैं सरकार ने आमजनता के साथ बडा धोखा किया है, जब विदेशों से क्रूड आयल सस्ता आ रहा था तो विदेशों को रिफाइंड कर देश की जनता से सस्ते दाम पर बेच रहे थे, परन्तु देश की जनता को उसका लाभ नहीं दिया गया, बल्कि टैक्स बढा कर सरकार अपना खजाना भरने लगी रही।
 बोहरा ने कहा की सरकार ने डीजल पट्रोल के दामों से लगभग 44 लाख करोड़ रुपए जनता से लूट कर अपना खजाना भरा है।
सरकार अब ईरान अमेरिका के युद्ध के कारण मई माह में ही लगातार तेल के भाव बढा रही हैं, आज देश में तेल किल्लत बता कर तेल के दाम बढा रही हैं वहीं प्राईवेट कम्पनी रिलायंस एवं नायरा आज भी तेल का निर्यात कर रही हैं, यह सरकार की कैसी नीति है देश तेल संकट जूझ रहा है दूसरी ओर निर्यात किया जा रहा है। जनता पर तेल के भाव बढाए जा रहे है।
रूस से सस्ता तेल लेने में सरकार को एतराज हैं, क्योंकि अमेरिका ने मना कर दिया है। सरकार अमेरिका के आगे नतमस्तक हो गई हैं, उन्हें अपने दोस्त को एवं अपने आप को एपस्टीन फाईल से बचाना है।
उन्हें देश की जनता से अब कोई मतलब नहीं हैं, क्योंकि सरकार जिन पिलरों पर टिकी है। वह अभी मजबूती से खडे है।देश के हालात के लिए वो भी जिम्मेदार हैं,जिस तरह से देश मे नफरत ,धर्म के नाम पर भेदभाव, ईडी, सीबीआई, इनकमटैक्स, चुनाव आयोग, अब तो न्यायालय पर अतिक्रमण जैसे कर लिया, उसके बावजूद सरकार के दोनों पिलर अपनी सहमति के साथ खडे है।
 तेल के दाम बढाने से केवल तेल के दाम नहीं बढेंगे, बल्कि सभी वस्तुओं के दामों मे भारी बढोतरी होगी, जिससे आम जनजीवन प्रभावित होगा।
 इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पडेगा, जब जनता के पास पैसा नहीं होगा तो बाजार में मांग घटेगी, मांग घटेगी तो उत्पादन घटेगा, उत्पादन घटेगा तो छटनी होगी, छटनी होगी तो बेरोजगारी बढेगी, स्वभाविक हैं अपराध भी बढेंगे।
 सरकार ने देश के सरकारी संस्थाओं को बेच कर अपने लिए एक चुनौती और खडी कर ली हैं, देश की संकट की घडी मे सरकारी संस्थान ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,सरकारी संस्थाऐं सरकार की नियमित आय की प्रमुख स्त्रोत होती हैं, अपने मुनाफे का अधिकांश सरकार के खजाने में जमा कराते थे।
सरकार को तेल पर जो टैक्स/वेट लगाए हैं उनमें कमी कर जनता को राहत देनी चाहिए, जिससे ऊपर जो नकारात्मक प्रभाव पडने वाले हैं उनसे बचा जा सके।जिससे बाजार में मांग यथावत बनी रहे  सरकार को जीएसटी के रूप में आय बनी रहे।
परन्तु देश की वित्त मंत्री ने कहा है कि पट्रोल डीजल पर उत्पाद शुल्क मे कटौती करने से सरकार को एक लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा।सरकार ने जो जनता से सस्ते क्रूड आयल होने पर जो लूट की हैं सरकार उसमें से ही जनता को छुट दी जानी चाहिए।परन्तु सरकार ऐसा नहीं करेगी।
यह मँहगाई किसी विशेष समुदाय, धर्म, समाज, एवं जाति के लिए नहीं हैं बल्कि इसकी जद में सब आयेंगे।इसलिए हमें समय रहते सरकार की नीतियों पर सवाल करने चाहिए।अन्यथा  हम सब के सामने विशेष चुनौती आने वाली हैं विशेष रूप से बेरोजगारों, गरीबों के समक्ष।

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