डीग में मंगल प्रवेश पर जैन मुनि ने अहिंसा, संयम और आत्मचिंतन को बताया जीवन का वास्तविक आधार
डीग (नीरज जैन) जैन मुनि सुमद्र सागर महाराज ने शनिवार की शाम जलमहलों की नगरी डीग में मंगल प्रवेश किया। सकल दिगंबर जैन समाज ने अध्यक्ष वीरेंद्र जैन के नेतृत्व में पद-प्रक्षालन कर आगवानी की। इसके बाद श्रद्धालुओं के साथ शोभायात्रा के रूप में उन्हें पुरानी सब्जी मंडी स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ले जाया गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि सुमद्र सागर महाराज ने कहा कि जैन दर्शन आत्मा की पवित्रता, अहिंसा, संयम और आत्मजागरण का दर्शन है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक वैभव धन, पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि उसके भीतर विद्यमान सद्गुण और आत्मशुद्धि है। जब तक जीव राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों से मुक्त नहीं होता, तब तक उसे सच्ची शांति प्राप्त नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का संदेश केवल किसी एक समाज के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए है। अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा से बचना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को पीड़ा न पहुंचाना है। संयम जीवन को मर्यादित और सार्थक बनाता है, जबकि आत्मचिंतन मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप का बोध कराता है।
मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान भौतिकतावादी युग में धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि अपने भीतर करुणा, क्षमा, मैत्री और समता के भावों का विकास करना है। आत्मा की ओर लौटने वाला प्रत्येक कदम मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ने वाला कदम है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, संयम और सदाचार को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर धर्मेंद्र जैन, ताराचंद जैन ,सुशील जैन ,गोपाल प्रसाद जैन, संजय जैन, योगेश जैन, विकास जैन, अशोक जैन,नरेश जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित थे।


