बजट व कार्रवाई के अभाव में खतरे के साए में पढ़ाई: खैरथल-तिजारा जिले में 21 सरकारी स्कूल जर्जर, दर्जनों आंगनबाड़ी और पंचायत भवन भी बदहाल

Jun 10, 2026 - 19:01
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बजट व कार्रवाई के अभाव में खतरे के साए में पढ़ाई: खैरथल-तिजारा जिले में 21 सरकारी स्कूल जर्जर, दर्जनों आंगनबाड़ी और पंचायत भवन भी बदहाल

खैरथल (हीरालाल भूरानी) झालावाड़ जिले में सरकारी स्कूल की छत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद भी खैरथल-तिजारा जिला प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। जिले में बजट की कमी और प्रशासनिक सुस्ती के चलते अधिकांश भवन आज भी बदहाल स्थिति में खड़े हैं। जिले में 21 सरकारी स्कूल जर्जर हालत में हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी, पंचायत भवन और ऐतिहासिक इमारतें खस्ताहाल है। स्कूलों के लिए नए भवन निर्माण की योजना शिक्षा विभाग कागजों से आगे नहीं बढ़ा पाया। नतीजतन हजारों विद्यार्थी खतरे के साए में पढ़ाई करने को मजबूर है। 
समसा कार्यालय नहीं बनने से अटकी फाइलेंः 
जर्जर विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण और नए भवनों के लिए बजट जारी करने की जिम्मेदारी जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा अभियान (समसा) कार्यालय की है। लेकिन जिला गठन के बाद भी खैरथल तिजारा में समसा का स्वतंत्र कार्यालय नहीं है। पूरा कामकाज अभी भी अलवर से संचालित हो रहा है, जिससे फाइलें विभागीय प्रक्रियाओं में उलझी हुई है और विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। स्थिति यह है कि 21 जर्जर विद्यालयों में से केवल चार विद्यालयों को ही बजट स्वीकृत हो पाया है, जबकि शेष 17 विद्यालय अब भी पुनर्निर्माण की प्रतीक्षा में है।
30 आंगनबाड़ी केंद्र और 20 पंचायत भवन भी खस्ताहालः
समस्या केवल विद्यालय भवनों तक सीमित नहीं है। किशनगढ़बास ब्लॉक के लंगड़बास स्थित फैजपुर सामुदायिक भवन, मोठ्का की मेघवाल बस्ती का सामुदायिक भवन और लंगड़बास का पुराना पंचायत भवन समेत कई सरकारी परिसंपत्तियां जर्जर अवस्था में है। जिले में करीब 30 आंगनबाड़ी केंद्र और 20 पंचायत भवन भी खस्ताहाल बताए जा रहे हैं। इन भवनों में प्रतिदिन बच्चों, महिलाओं और ग्रामीणों का आवागमन रहता है, ऐसे में हर समय हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
खैरथल का लाल किला बना सबसे खतरनाक जोन नगर
परिषद क्षेत्र के खैरथल गांव में स्थित ऐतिहासिक लाल किला भी खतरे की श्रेणी में शामिल है। इस प्राचीन भवन में आज भी तीन से चार परिवार निवास कर रहे हैं। नगर परिषद ने पिछले वर्ष इसका आंशिक जीर्णोद्धार कराया था, लेकिन भवन की मूल संरचना अब भी कमजोर बनी हुई है। गांव में वर्षों पुरानी अनेक हवेलियां भी है, जिनमें लोग निवास कर रहे हैं और जिनकी स्थिति किसी भी समय गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
रेलवे फाटक से सिनेमा रोड स्थित राजस्थान स्टेट वेयर हाउस की दीवार क्षतिग्रस्त हो रही है। यह दीवार आम रास्ते के किनारे होने के कारण राहगीरों के लिए खतरा बनी हुई है। वहीं, पशु चिकित्सालय के सामने सार्वजनिक निर्माण विभाग का अपना कार्यालय भवन भी वर्षों से बंद पड़ा है और जर्जर होने की कगार पर पहुंच चुका है।
सवाल : क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा प्रशासन ?:
जर्जर भवनों की पहचान कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। जब तक समय पर बजट स्वीकृत कर पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य नहीं कराए जाएंगे, तब तक दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहेगी। बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी गंभीर हादसे के बाद ही सक्रिय होगा या फिर चिन्हित भवनों पर समय रहते ठोस कार्रवाई की जाएगी?

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