सृजक की गोष्ठी में गूंजीं समसामयिक और स्त्री विमर्श की कविताएं; हाड़ा कुंभा के इतिहास से लेकर सावन की बांसुरी की तान तक

Jul 12, 2026 - 19:56
Jul 12, 2026 - 19:58
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सृजक की गोष्ठी में गूंजीं समसामयिक और स्त्री विमर्श की कविताएं; हाड़ा कुंभा के इतिहास से लेकर सावन की बांसुरी की तान तक

अलवर, (कमलेश जैन) अलवर की प्रतिष्ठित एवं सक्रिय साहित्यिक संस्था 'सृजक' की मासिक कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संस्था के अध्यक्ष एवं ख्यात उर्दू शायर सरदार अमरीक सिंह 'अदब' की अध्यक्षता में आयोजित इस गोष्ठी में शहर के नामचीन साहित्यकारों और कवियों ने अपनी कालजयी रचनाओं से 'अपने समय की सच्ची कविताओं' को जीवंत किया। गोष्ठी का शुभारंभ कवि रामचरण 'राग' द्वारा प्रस्तुत सरस सरस्वती वंदना से हुआ, जिसके बाद देर रात तक साहित्यानुरागी रचनाओं के रस में डूबे रहे।

  • ऐतिहासिक शौर्य और संघर्ष के गीत

कवि गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रघुवर दयाल जैन ने 'हाड़ा कुंभा' के ऐतिहासिक शौर्य पर आधारित रचना सुनाकर राष्ट्रभक्ति का रंग घोला। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल राम शर्मा 'दिवाकर' ने जीवन में संघर्ष की प्रेरणा देता हुआ ओजस्वी गीत प्रस्तुत किया। वहीं वरिष्ठ साहित्यप्रेमी घनश्याम शर्मा ने शहीद ऊधम सिंह के बलिदान पर अमर प्रताप वर्मा की ओजस्वी कविता का पाठ कर गोष्ठी को एक नई ऊंचाई प्रदान की।

  • स्त्री विमर्श और समसामयिक मुद्दों पर प्रहार

कार्यक्रम में स्त्री विमर्श और समसामयिक विषयों पर गंभीर लेखन देखने को मिला। विशिष्ट अतिथि प्रदीप कुमार भारद्वाज ने स्त्री विमर्श पर एक उत्कृष्ट साहित्यिक गीत पेश किया। इसके साथ ही वरिष्ठ कवयित्री शीला स्वामी, सरिता भारत एवं सीमा कालरा की रचनाओं में नारी मन के आक्रोश और मार्मिकता की ऐसी अभिव्यक्ति हुई, जिसने पूरे वातावरण को गंभीर और विचारणीय बना दिया।

संस्था के अध्यक्ष सरदार अमरीक सिंह 'अदब', रामचरण 'राग', संगीतज्ञ चिन्मय पाराशर, देवांश जाँगिड़ व मुकेश गुप्त 'अचल' ने समसामयिक विषयों पर केंद्रित धारदार ग़ज़लें पेश कीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।

  • लोक संस्कृति, ऋतु और शायरी का अनूठा संगम

सदाराम चौमूं और अभिषेक गर्ग की शायरी ने महफिल में खूब रंग जमाया। कवि डॉ. वेद प्रकाश यादव 'सहज' ने अनूठी मेवाती भाषा में पारिवारिक समस्याओं को उजागर करता मर्मस्पर्शी गीत गाया, तो किशन लाल खैरालिया ने अपनी रचना के जरिए ग्रामीण स्मृतियों को जीवंत कर दिया। युवा कवि महेश 'वेदामृत' ने ऋतुराज बसंत पर उत्साह से भरी रचना पढ़ी, जिस पर युवाओं ने जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम का एक बड़ा आकर्षण ख्यात बांसुरी वादक सुभाष नकड़ा रहे, जिन्होंने बांसुरी पर सावन का मधुर गीत सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सृजक संस्थान के कोषाध्यक्ष हेमराज सैनी ने बताया कि इस मौके पर साहित्य जगत और समाज की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें सृजक के संरक्षक भरत सिंह अहरोदिया, कवि प्रेम शर्मा, राधेश्याम शर्मा, वरिष्ठ साहित्यप्रेमी अशोक शर्मा, शिक्षाविद प्रदीप सैनी, हरिनारायण, खुशाल सैनी, गोविन्द गुप्ता, भाविक सैनी तथा समाजसेवी जितेन्द्र पोपली सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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