सलेमपुर गांव की सर्वसम्मति से मृत्युभोज पूरी तरह बंद करने का फैसला, सामाजिक सुधार की दिशा में बढ़ाया महत्वपूर्ण कदम
कठूमर (दिनेश लेखी) उपखंड क्षेत्र के ग्राम सलेमपुर में रविवार को सामाजिक सुधार की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए सर्व समाज के लोगों ने सर्वसम्मति से गांव में मृत्युभोज (नुक्ता) की कुप्रथा को पूर्ण रूप से बंद करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। ग्रामीणों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे समाज हित में एक प्रेरणादायक कदम बताया।
गांव में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मृत्युभोज जैसी परंपरा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अनावश्यक बोझ डालती है। किसी परिजन के निधन के बाद परिवार पहले से ही मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा होता है। ऐसे समय में मृत्युभोज का आयोजन करना कई परिवारों के लिए कठिन साबित होता है। कई बार लोगों को इसके लिए कर्ज तक लेना पड़ता है, जिससे वर्षों तक आर्थिक परेशानियां बनी रहती हैं।
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि मृत्युभोज एक सामाजिक कुप्रथा है, जो समाज के प्रत्येक वर्ग का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शोषण करती है। इसे समाप्त करना समय की आवश्यकता है। सर्व समाज के लोगों ने एकमत होकर संकल्प लिया कि भविष्य में गांव में किसी भी परिवार द्वारा मृत्युभोज का आयोजन नहीं किया जाएगा तथा सभी ग्रामीण इस निर्णय का पालन सुनिश्चित करेंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि समाज में व्याप्त ऐसी कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सामूहिक जागरूकता और सामाजिक एकजुटता आवश्यक है। उनका मानना है कि सलेमपुर का यह निर्णय अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा तथा सामाजिक सुधार की दिशा में एक नई शुरुआत साबित होगा। बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने इस निर्णय को सफल बनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर नवाब सिंह, बच्चन सिंह, मोती सिंह, रामचन्द्र सिंह, विजेंद्र सिंह, गोपाल मीणा, बबलू मीणा, संजय मीणा, पिंटू मीणा, अमीचंद मीणा, हरिओम डीलर, मूलचंद सैनी, लखन सैनी, सुखलाल सैनी, लोकेंद्र सैनी, ओमप्रकाश शर्मा, सोनू पुजारी, शिवकुमार सिंह, जल सिंह, सुकट सिंह सहित सर्व समाज के अनेक गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे।


