10 दिन में मांगें नहीं मानीं तो राजस्थान के निजी विद्यालयों का अनिश्चितकालीन बंद आंदोलन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

Jul 15, 2026 - 16:20
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10 दिन में मांगें नहीं मानीं तो राजस्थान के निजी विद्यालयों का अनिश्चितकालीन बंद आंदोलन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) गैर सरकारी विद्यालयों से जुड़े प्रतिनिधियों ने बुधवार को उपखंड अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं निदेशक, प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान के नाम ज्ञापन सौंपकर निजी विद्यालयों के साथ कथित दमनकारी नीतियों, आरटीई भुगतान में हो रही देरी तथा प्रशासनिक प्रताड़ना पर रोक लगाने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि राजस्थान के गैर सरकारी विद्यालय राज्य की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों और आरटीई से जुड़ी समस्याओं के कारण निजी विद्यालय आर्थिक एवं प्रशासनिक संकट का सामना कर रहे हैं। प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि आगामी 10 दिनों के भीतर उनकी मांगों का बिना किसी शर्त समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के गैर सरकारी विद्यालय अनिश्चितकालीन बंद आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग की होगी।

ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के T.M.A. Pai Foundation (2002), Islamic Academy of Education (2003), P.A. Inamdar (2005) तथा Modern School (2004) के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि निजी शिक्षण संस्थानों को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त है तथा सरकार गुणवत्ता और जनहित के लिए युक्तियुक्त नियंत्रण लागू कर सकती है, लेकिन अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है।

ये रखी प्रमुख मांगें

  1. शिक्षा संबल निरीक्षण व्यवस्था को समाप्त किया जाए।
  2. सीसीटीवी जांच के आधार पर जारी कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएं।
  3. आरटीई के तहत पीपी-3, पीपी-4 एवं पीपी-5 कक्षाओं का भुगतान तत्काल शुरू किया जाए।
  4. नॉन-आरटीई विद्यार्थियों के अभाव में भुगतान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएं।
  5. सत्र 2018, 2019 एवं 2020 के लंबित आरटीई भुगतान शुरू किए जाएं।
  6. कोविड काल (2020-21) में ऑफलाइन शिक्षण कराने वाले विद्यालयों का भुगतान बिना शर्त किया जाए।
  7. दोहरे नामांकन के नाम पर की जा रही कार्रवाई एवं प्रताड़ना समाप्त की जाए।
  8. प्रत्येक वर्ष सत्र समाप्त होने से पूर्व आरटीई की दोनों किश्तों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
  9. यूनिट कॉस्ट में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि का आदेश जारी किया जाए।
  10. पुस्तकों की राशि सीधे अभिभावकों के खातों में भेजी जाए तथा प्रति विद्यार्थी पुस्तक मद की राशि ₹1000 से ₹2000 निर्धारित की जाए।
  11. बार-बार जांच एवं निरीक्षण के नाम पर होने वाली प्रताड़ना बंद की जाए।
  12. निजी विद्यालयों से संबंधित नई योजनाएं बनाने से पहले उनके संगठनों से विचार-विमर्श किया जाए।

ज्ञापन के अंत में प्रतिनिधियों ने सरकार से सकारात्मक रुख अपनाते हुए मांगों का शीघ्र समाधान करने की अपील की है।

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