खैरथल की प्याज़ मंडी में लाल प्याज की बंपर आवक-जावक: व्यापारियों के चेहरे खिले, स्थाई मंडी की दरकार

खैरथल की प्याज़ मंडी में लाल प्याज की बंपर आवक-जावक: व्यापारियों के चेहरे खिले, स्थाई मंडी की दरकार

खैरथल (अलवर, राजस्थान/ हीरालाल भूरानी) अपने विशिष्ट खट्टे-मीठे ज़ायके और अत्यधिक नमी के कारण विख्यात  खैरथल क्षेत्र में उत्पादित नासिक रेड प्रजाति का लाल प्याज इन दिनों परवान चढ़ा हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बेमौसम बारिश से काफी मात्रा में फसल के खराब हो जाने के बावजूद भरपूर उत्पादन एवं ठीक-ठाक भावों से किसानों के चेहरों पर मुस्कान छाईं हुई है।
खैरथल और अलवर में प्याज़ मंडी में दिल्ली सहित विभिन्न प्रांतों के थोक व्यापारियों द्वारा जमकर खरीदारी करने के अलावा दूरभाष पर भी सौदे हो रहे हैं तो बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज स्थानीय मंडियों में नहीं लाकर सीधे ही दिल्ली की आजादपुर मंडी में लेजाकर बेचने के कारण सैकड़ों की संख्या में मिनी ट्रक प्याज के कट्टों से भरकर जाते हुए देखे जाते हैं।
नकदी कृषि जिंसों में महफूज लाल प्याज का अलवर जिले के विभिन्न गांवों में पिछले छः सात दशकों से उत्पादन किया जा रहा है।कभी बादाम के भाव तो कभी बेर के भावों के रहने के कारण किसान कभी निहाल तो कभी बदहाल होते रहने की नौबत आने की वजह से इस की फसल को जुआ की संज्ञा भी दी जाती है। वैसे तो सभी किसानों द्वारा कम ज्यादा रकबा प्याज़ बुआई की जाती है परंतु
मेव समुदाय के किसानों में प्याज़ का उत्पादन करना पहली पंसद है। किसानों द्वारा पिछले एक दशक से सिर्फ प्याज़ का उत्पादन ही नहीं किया जाता है अपितु प्याज़ के कण बीज से गंठी बीज भी बहुत भारी  मात्रा में पैदा किया जाता और पौध भी तैयार कर नर्सरी में ही बेचान किया जाता है।इससे उनको दोहरा लाभ मिलता है। एक दशक पूर्व गुजरात व महाराष्ट्र के नासिक,तलाजा आदि स्थानों से आने वाले गंठी बीज पर ही पूर्ण निर्भरता थी किन्तु अब जब यहां ही गंठी बीज तैयार हो रहा है तो बाहरी प्रांतों से आवक सतर से अस्सी प्रतिशत घट गई है। जबकि पांच साल पहले गुजरात व महाराष्ट्र से आने वाले गंठी बीज पर ही निर्भरता बनी हुई थी।
यहां के खट्टे-मीठे स्वाद के कारण  इसकी विशेष मांग रहती ही है साथ ही यहां इसकी फसल ऐसे समय पर आती है जब देश भर में प्याज़ का भंडारण समाप्ति की ओर होता है और प्रमुख उत्पादक गुजरात व महाराष्ट्र में नयी फ़सल उतरने में अभी एक डेढ़ माह बाकी होता है ऐसे में यहां के उत्पादन पर ही निर्भर होना पड़ता है। दीपावली के आस पास से शुरू होने वाला प्याज़ का उत्पादन करीब तीन महीने तक अपनी पूरी रंगत पर रहता है। किंतु अत्याधिक नमी के कारण यहां के लाल प्याज का ज्यादा समय तक भंडारण नहीं किया जा सकता है।
राजस्थान के दिग्गज नेता रहे दौसा सांसद पंडित नवल किशोर शर्मा जब नैफेड के चेयरमैन थे तब अलवर जिले में लाल प्याज के वैज्ञानिक उत्पादन करने और अपने ही खेतों में कण बीज से गंठी बीज तैयार करने की विधि सिखाने पर बहुत काम किया गया। नैफेड की संस्था कृषि विज्ञान संस्थान के वेज्ञानिकों ने गांवों में ही कैंपेन कर कृषकों को प्रशिक्षण व मुफ्त कण बीज,खाद और दवाइयां आदि उपलब्ध कराई, प्याज़ ग्राम विकसित किए।उसी के फलस्वरूप आज़ किसानों को दोहरी फ़सल का लाभ मिल रहा है।
किसानों को दिल्ली जाकर अपनी फसल बेचने की परेशानी से बचाने के लिए खैरथल में अंतरराज्यीय फल सब्जी मंडी की आवश्यकता दशकों से महसूस की जा रही है, राजस्थान कृषि उपज विपरण निगम द्वारा योजना बनाई गई थी किन्तु मूर्तरूप देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यदि यहां आजादपुर मंडी जैसी मंडी विकसित हो जाए तो राजस्थान के विभिन्न भागों से दिल्ली जा रही कृषि उपज को यहीं रोका जा सकता है, इससे सरकार को भारी राजस्व आय मिलने के साथ हजारों किसानों को भी लाभ मिलेगा।

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