बिजली विभाग की खौफनाक लापरवाही: शटडाउन के बावजूद दौड़ा 11,000 वोल्ट करंट, खंभे पर जिंदा जला लाइनमैन
ट्रांसफॉर्मर बदलने के लिए 25 फीट ऊंचे खंभे पर चढ़ा था, 10 मिनट तक जलता रहा
सोनभद्र/लोहोटा (उत्तर प्रदेश/ शशि जायसवाल): उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद अंतर्गत लोहोटा गांव में गुरुवार शाम एक रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा हुआ। बिजली विभाग की घोर लापरवाही और तालमेल की कमी ने एक 40 वर्षीय संविदा लाइनमैन, संतोष कुमार की जान ले ली। आधिकारिक तौर पर 'शटडाउन' लेने के बावजूद अचानक हाई-वोल्टेज सप्लाई चालू कर दिए जाने से संतोष खंभे पर ही आग का गोला बन गए और उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
हादसे का आँखों देखा हाल: नियमों के बाद भी मौत का खेल
बिसहार निवासी संतोष कुमार लोहोटा गांव में नया ट्रांसफार्मर लगाने के कार्य पर तैनात थे।
प्रत्यक्षदर्शियों और उनके साथी हेल्पर मटरूलाल के अनुसार, संतोष ने सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया था। काम शुरू करने से पहले उन्होंने बाकायदा सब-स्टेशन पर सूचना देकर बिजली कटवाई (शटडाउन लिया) थी।
शाम करीब 7 बजे जब संतोष खंभे पर चढ़कर अंतिम चरणों का काम कर रहे थे, तभी अचानक 11 हजार वोल्ट की लाइन में करंट छोड़ दिया गया। देखते ही देखते जोरदार शॉर्ट सर्किट हुआ और संतोष का शरीर आग की लपटों में घिर गया। नीचे खड़े साथी मटरूलाल ने तुरंत उच्चाधिकारियों को फोन कर सप्लाई बंद करवाई, लेकिन तब तक संतोष की जीवनलीला समाप्त हो चुकी थी।
क्यों हुआ हादसा? (अधिकारियों का पक्ष)
सोनभद्र के अधिशासी अभियंता (XEN) एमबी ठाकुर के अनुसार, इस हादसे के पीछे विभागीय कर्मचारियों के बीच तालमेल का भारी अभाव और लापरवाही सामने आई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि: दो अलग-अलग टीमों को अलग-अलग स्थानों पर काम के लिए भेजा गया था।
संतोष और मटरू एक स्थान पर ट्रांसफार्मर लगा रहे थे, जबकि राजेश साहू नाम का दूसरा लाइनमैन दूसरी जगह काम कर रहा था।
कथित तौर पर राजेश साहू ने अपना काम पूरा होने के बाद सब-स्टेशन को लाइन चालू करने का निर्देश दे दिया, बिना यह सुनिश्चित किए कि अन्य फीडर या लाइन पर कोई और कर्मचारी काम तो नहीं कर रहा है। मामले की जांच कराई जा रही है।
सिस्टम पर खड़े होते गंभीर सवाल
बिंदु, मृतक की पत्नी का कहना है कि - "मेरे पति ने नियम से बिजली बंद करवाई थी, फिर करंट कैसे आया? हमें इंसाफ चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।" —
इस घटना ने विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है:
- समन्वय का अभाव: एक फीडर पर काम चल रहा है, तो दूसरे कर्मचारी के कहने पर सप्लाई कैसे चालू कर दी गई?
- सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी: क्या बिना 'अर्थिंग चैन' और उचित निगरानी के खंभे पर चढ़ना मजबूरी है?
- जिम्मेदारी: क्या संबंधित सब-स्टेशन ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी?
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक संतोष कुमार अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। उनके पीछे पत्नी बिंदु (35) और दो बेटे—आदर्श (15) व शिवम (18) रह गए हैं। पिता की इस भयावह मौत से पूरा परिवार सदमे में है और ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है।
आगामी मांगें और कार्रवाई
ग्रामीणों और परिजनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या (IPC 304) का मामला दर्ज नहीं होता और परिवार को उचित मुआवजा नहीं मिलता, वे शांत नहीं बैठेंगे।
उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- दोषी कर्मचारी और लापरवाह अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर।
- पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और बच्चों की शिक्षा का खर्च।
- संविदा कर्मियों के लिए कड़े सुरक्षा उपकरण और प्रोटोकॉल सुनिश्चित करना।
- यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि बिजली विभाग के लिए एक लाइनमैन की जान सिर्फ एक 'आंकड़ा' बनकर रह गई है।