पुरानी पोखर पर अतिक्रमण रुकवाने की मांग को लेकर सांसद को सौंपा ज्ञापन

Jan 14, 2022 - 20:04
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पुरानी पोखर पर अतिक्रमण रुकवाने की मांग को लेकर सांसद को सौंपा ज्ञापन

कामां (भरतपुर, राजस्थान) कस्बा कैथवाड़ा में बस स्टैंड के पास सेकड़ो वर्ष पुरानी पोखर पर भूमाफियाओ द्वारा सेकड़ो वर्ष पुरानी पोखर पर मिट्टी डालकर अतिक्रमण किए जाने को मामले को लेकर ग्रामीणों ने सांसद रंजीता कोली को ज्ञापन सौंपा और अतिक्रमण रुकवाने की मांग की
ग्रामीणो सेनमिली जानकारी के अनुसार कस्बा कैथवाड़ा में बस स्टैंड के पास गुलपाड़ा रोड पर सेकड़ो वर्ष पुरानी गुहली पोखर है। उस पोखर में पानी भरा हुआ है। कई भूमाफिया मिलकर के उस पोखर पर मिट्टी डालकर अतिक्रमण कर रहे है। भूमाफिया उस पोखर पर दुकान व पक्के मकान बनाने की नियत से पोखर में मिट्टी डलवा रहे है। जबकि राज्य सरकार की और से इस समय जल संरक्षण पखवाड़ा मनाया जा रहा है। वही दूसरी और कस्बा कैथवाड़ा में भू माफिया के हौसले  इस कदर बुलंद है की वह सैकड़ो पुरानी पोखर के अस्तित्व को मिटाने पर तुले है। जबकि  बरसात में पहाड़ के पानी से हर वर्ष पोखर भर जाती है। पोखर भरने से लगभग कस्बा कैथवाड़ा की 5000 आबादी को मीठा पानी पीने को मिलता है। कस्बा कैथवाड़ा में सभी जगह खारा पानी है। गुहली पोखर के आस पास ही मीठे पानी के स्त्रोत है। हर वर्ष बरसात में पहाड़ का पानी आने से पोखर भर जाती है। तथा आस पास का भूजल स्तर बढ़ जाता है । जिससे पूरे वर्ष भर पानी की पीने की किल्लत नही रहती है। लेकिन कई भूमाफिया मिलकर गुहली पोखर को खत्म करने पर तुले है। जिस जगह पोखर में भूमाफिया द्वारा मिट्टी डलवाकर भरत करवाया जा रहा है। उसके पास में काफी समय पहले  पीडब्लूडी द्वारा रूपारेल नदी के पानी के लिये सड़क में 12 मोरे दबाकर पानी के बहाव का रास्ता बनाया गया है।  रूपारेल नदी का पानी सीकरी आने के बाद कैथवाड़ा बांध में आता है। कैथवाड़ा बांध से पानी आगे राँफ व अन्य गांवों में जाता है। पानी का बहाव क्षेत्र गुहली पोखर में से आगे मोरो में जाकर पानी आगे बढ़ता है। 
पूर्व में भी एक और से भूमाफिया द्वारा मोरो को पाटकर अवरुद्ध किया जा चुका है। जिस पोखर पर भूमाफिया कब्जा कर मिट्टी डलवा रहे है। वह पोखर बस स्टैंड के पास पड़ती है। तथा उसकी कीमत कई करोड़ रुपये है। यह पोखर सेकड़ो वर्ष पुरानी है तथा इस पोखर में कुछ हिस्सा खातेदारी की भूमि का है तथा अधिक हिस्सा गेर खातेदारी की भूमि का है।  भूमाफिया द्वारा करोड़ो रूपये की पोखर को जिन खातेदारों के नाम पोखर का कुछ हिस्सा था उसे कोड़ियों के दामो में खरीद लिया। तथा कास्तकार की भूमि का बिना रूपांतरण करवाये उस पर मिट्टी डालकर दुकान व प्लाट काटने की सोच रहे है।  जबकि नियमानुसार अगर कोई आदमी कास्त की भूमि को खरीदकर उसको व्यावसायिक प्रयोग में लेता है तो उसे सरकार में फीस जमा करानी पड़ती है। लेकिन नियम व प्रशासन  की परवाह करे बिगर करोड़ो की पोखर पर कब्जा कर अपनी जेबें भरना चाहते है।
 पोखर पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर कस्बावासियों  में काफी रोष है। कस्बावासियों का कहना है कि अगर सेकड़ो वर्ष पुरानी पोखर पर अतिक्रमण हो गया तो उन्हें भारी मात्रा में पीने के पानी समस्या हो जाएगी। कस्बे की आधी आबादी के नालियों का पानी हर समय पोखर में आता है।  प्रशासन को चाहिये सेकड़ो वर्ष पुरानी  पोखर पर किसी भी प्रकार से अतिक्रमण नही होने दे अगर प्रशासन द्वारा भूमाफियाओं के खिलाफ कोई कार्यवाई नही की गई तो कस्बेवासी बस स्टैंड पर धरने पर बैठ जायेगे।
घनश्याम शर्मा (हल्का पटवारी)  का कहना है कि- तहसीलदार पहाड़ी के आदेश से पोखर में मिट्टी डालने के कार्य को रुकवा दिया गया है। बगैर पैमाइश के कोई भी निर्माण कार्य नही होगा। अगर फिर भी कोई पोखर पर निर्माण कार्य करता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जायेगा।

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