पंचायत-निकाय चुनाव: सरकारी अनुमान 158322 परिवारों का था, 7.03 लाख लोगों का ऑनलाइन सर्वे, 5 अगस्त को हाईकोर्ट पहुंचेगी आयोग की रिपोर्ट
ओबीसी के 1.40 लाख परिवार मिले, आबादी के आधार पर तय होंगी 21% सीटें
खैरथल (हीरालाल भूरानी) पंचायत राज और नगर निकाय चुनाव से पहले जिले में कराया गया ओबीसी परिवार सर्वे पूरा हो गया है। सर्वे में जिले के 1 लाख 40 हजार 563 परिवारों का ऑनलाइन सत्यापन किया गया है।
अब यह रिपोर्ट राज्य ओबीसी आयोग को भेजी जाएगी, जिसे 5 अगस्त को हाईकोर्ट में पेश किया जाना है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों, नगर निकायों और जिला परिषद में ओबीसी आरक्षण का नया खाका तय होने की संभावना है। इससे जिले की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। ओबीसी आयोग के निर्देश पर हुए सर्वे में ग्रामीण क्षेत्र के 118138 तथा शहरी क्षेत्र के 22425 परिवार शामिल हैं। इन परिवारों के करीब 7.03 लाख सदस्यों का विवरण राजधारा एप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज किया गया। सर्वे का कार्य एसडीएम को नोडल अधिकारी बनाकर बीएलओ और सुपरवाइजरों ने घर-घर जाकर पूरा किया। सांख्यिकी विभाग के उपनिदेशक महेंद्र सिंह ने बताया कि 28 जुलाई को रिपोर्ट जिला कलेक्टर को सौंप दी गई है। जिला कलेक्टर इसे राज्य ओबीसी आयोग को भेजेंगे, जिसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करेगा।
जिले में ओबीसी आरक्षण को लेकर अब आयोग की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। रिपोर्ट पेश होने के बाद ही चुनावी क्षेत्रों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन ने सर्वे प्रक्रिया को तय समय में पूरा कर रिपोर्ट तैयार कर ली है।
सर्वे में अनुमान से17759 परिवार कम मिले, आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के संकेत
सर्वे शुरू होने से पहले सरकार ने जिले में 158322 ओबीसी परिवारों का अनुमान लगाया था। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 136035 तथा शहरी क्षेत्र में 22288 परिवार शामिल थे। सर्वे पूरा होने पर 140563 परिवार ही दर्ज हुए। यानी अनुमान से 17759 परिवार कम मिले। स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए 21 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान है। आयोग की रिपोर्ट और न्यायालय के निर्देश के बाद जिले में पंचायतों, पंचायत समितियों, जिला परिषद और नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण का अंतिम स्वरूप तय होगा। इससे कई वाडों और सीटों का आरक्षण बदल सकता है और राजनीतिक दलों को उम्मीदवार चयन की रणनीति भी बदलनी पड़ सकती है। जिले की 2011 की जनगणना में आबादी 9.66 लाख थी, जो प्रशासनिक अनुमान के अनुसार 2026 में बढ़कर करीब 13.15 लाख पहुंच चुकी है।
आबादी में वृद्धि के कारण परिसीमन और आरक्षण दोनों पर इसका असर माना जा रहा है। अब तक ओबीसी आरक्षण का निर्धारण अधिकांश मामलों में लॉटरी प्रणाली से होता था। यानी कोई भी वार्ड या पंचायत ओबीसी के लिए आरक्षित हो सकती थी। ओबीसी सर्वे लागू होने के बाद संभावना है कि एससी-एसटी की तरह ओबीसी आबादी के आधार पर वार्ड और सीटों का आरक्षण तय किया जाए। सर्वे के आंकड़ों के आधार पर अब प्रशासन ओबीसी आबादी का वर्गवार विश्लेषण तैयार करेगा। इसके बाद आरक्षण की नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों के अनुसार सर्वे रिपोर्ट से स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

