महाभारत कालीन पांडुपोल हनुमान मंदिर मे मेले का आयोजन :भूत पिशाच निकट नहीं आवे ,महावीर जब नाम सुनावे, नासे रोग हरे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा
अलवर (अनिल गुप्ता)
अलवर जिले के सरिस्का स्थित महाभारत कालीन पांडुपोल हनुमान मंदिर में बड़ी संख्या में हनुमान जी के भक्त दर्शन करने पहुंचे। सभी श्रद्धालुओं के मन में सिर्फ एक ही आस्था का ज्वार दिखाई दिया "भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे नासे रोग हरे सब पीरा जो सुमिरे हनुमत बलबीरा" इसी श्रद्धा के साथ भक्त बढ़ते रहे हनुमान जी के दर्शन करते रहे और बाबा के दाल बाटी चूरमा बेसन के लड्डू का भोग लगाया जबरदस्त भीड़ रही बड़ी संख्या में पैदल श्रद्धालु दंडोति देते हुए पहुंचे तथा रोडवेज बस से निधि संसाधनों से भी लोग पांडुपोल हनुमान मंदिर पहुंचे।
मंदिर के सेवक बाबूलाल शर्मा चेतन शर्मा ने बताया महाभारत काल समय में भीम ने रास्ता निकालने के समय गड़ा से इस पहाड़ पर पॉल बनाई थी जहां भी का अभिमान चूर करने के लिए हनुमान जी पहुंचे और उन्होंने लेते हुए रास्ते में अपनी पूंछ को फैला दिया जिसे भी नहीं उठा सके थे। तब हनुमान जी ने अपने दर्शन दिए और भीम का अभियान भी खंडित हो गया। तभी से इस महाभारत कालीन पांडुपोल हनुमान मंदिर पर हरियाणा दिल्ली मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश सहित अन्य प्रति से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हनुमान जी के दर पर पहुंचते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हुए मनोकामना बाबा के दरबार में रखते हैं । सोमवार को इंद्रदेव की कृपा रही जहां पांडव और हनुमान क्षेत्र में भी बारिश से हनुमान जी के भक्तों का स्वागत सत्कार और अभिनंदन किया मालाखेड़ा क्षेत्र से होकर हजारों की संख्या में सोमवार को श्रद्धालु पैदल पहुंचे हैं।

