जैन धर्म के 10 लक्षण पर्व के तीसरा दिन उत्तम आर्जव
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) आचार्य श्री ज्ञान भूषण जी रत्नाकर ने 10 लक्षण पर्व के तीसरे दिन प्रवचन के दौरान बताया कि जैन धर्म में दशलक्षण महापर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव (सरलता/ईमानदारी) का होता है। इस दिन के अनुयायी मन की शुद्धता, व्यवहार की सरलता और जो सोचते हैं, वही कहने और करने का अभ्यास करते हैं, ताकि हृदय में कोई छल या कपट न रहे।
उत्तम आर्जव का अर्थ:
भावों की शुद्धता: मन में किसी भी प्रकार का द्वेष या गलत विचार न रखना।
सरल व्यवहार: जो विचार हों, उन्हें सीधे और सरल तरीके से व्यक्त करना, जिससे किसी को धोखे में नहीं रखा जा सके।
ईमानदारी और प्रमाणिकता: अपने कार्यों और शब्दों में पूरी ईमानदारी बनाए रखना, जिससे दूसरों के साथ विश्वास और प्रमाणिकता बनी रहे।
तीसरे दिन का महत्व यह पर्व आत्मा की शुद्धि पर जोर देता है।
आर्जव धर्म का पालन करके व्यक्ति संसार के दुखों से मुक्ति की ओर बढ़ता है।
यह बाहरी दिखावे से हटकर मन की स्वच्छता और निष्कपटता को दर्शाता है।
दस लक्षण पर्व जैन धर्म का ऐसा त्योहार है जो 10 दिन तक मनाया जाता हे इन दस दिनों में जैन धर्म के अनुयायी दस लक्षण उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव,आर्जव, सत्य, संयम, शौच, तप, त्याग, आकिंचन्य एवं ब्रह्मचर्य।
दस लक्षण पर्व से यह बात मनुष्य जीवन में सीख लेना है की -कबीरा आप ठगाइए ,और न ठगिये कोए, आप ठगाए सुख उपजे ,पर ठगिये दुःख होए " कोई अपने को ठग ले तो कोई हर्ज़ नहीं पर इस बात का संतोष तो रहेगा की मैंने तो किसी को धोका नहीं दिया है।
इन दस दिनों में आत्मा को पवित्र बनाने वाले दस धर्मों का विशेष अभ्यास किया जाता है ।


