बाड़मेर में बारिश भरी रात में मानवता की अद्भुत मिसाल: 2 दिन की नवजात के लिए जीवनदाता बने रक्तवीर
बाड़मेर / राकेश लखारा
एक तरफ मूसलाधार बारिश और रात का सन्नाटा, तो दूसरी तरफ समय से जिंदगी की जंग... ऐसे विकट और कठिन हालात में भी बाड़मेर के एक सेवाभावी रक्तवीर ने मानवता की लौ को बुझने नहीं दिया। जिला अस्पताल बाड़मेर में भर्ती महज दो दिन की नवजात बच्ची (बेबी ऑफ शांति पत्नी दिनेश) की तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने तत्काल अत्यंत दुर्लभ 'O-नेगेटिव' फ्रेश रक्त की आवश्यकता बताई।
परिजनों की बेबसी के बीच उम्मीद बना संस्थान
दुर्लभ ब्लड ग्रुप होने के कारण परिजन गहरे संकट में आ गए। ऐसे में 'ह्यूमैनिटी रक्त एवं सेवा सोसायटी बाड़मेर' बेबस परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। सूचना मिलते ही सोसायटी के सक्रिय सदस्य देहदानी भींयाराम खोड़ीयाल ने बिना एक पल गंवाए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) आटी में कार्यरत ANM एवं रक्तदाता रामू लेगा से संपर्क किया।
बारिश को चीरकर अस्पताल पहुंचे 'रक्तवीर'
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तेज बारिश और देर रात के बावजूद रामू लेगा तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे और 8वीं बार स्वैच्छिक रक्तदान कर उस मासूम की जान बचाई। जब खराब मौसम के कारण लोग घरों से निकलने से कतरा रहे थे, तब रामू लेगा ने एक अनजान परिवार की खुशियां लौटाकर मिसाल कायम की।
"रक्तदान ही सबसे बड़ा महादान"
ह्यूमैनिटी रक्त एवं सेवा सोसायटी ने रक्तदाता रामू लेगा के सेवा भाव को नमन करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर भींयाराम खोड़ीयाल ने कहा:
"रक्तदान ही सबसे बड़ा महादान है। रक्त बनाने का कोई कारखाना नहीं होता, इसे केवल एक इंसान ही दूसरे इंसान को दे सकता है। एक यूनिट रक्त न केवल मरीज की जान बचाता है, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों को नया जीवन देता है।"
सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि इन्हीं समर्पित रक्तवीरों के सहयोग से बाड़मेर जिले में वर्षों से कोई भी जरूरतमंद मरीज रक्त के अभाव में असहाय नहीं रहता। संस्था का यह मानव सेवा अभियान आगे भी इसी निष्ठा और समर्पण के साथ निरंतर जारी रहेगा।

