लक्ष्मणगढ़ में बंदरों का तांडव: राहगीरों पर हमला, बच्चों को स्कूल जाने में डर,प्रशासन से गुहार
लक्ष्मणगढ़ में बंदरों के आतंक से बेहाल हुए कस्बेवासी: फसलों को भारी नुकसान, राहगीरों पर हमले; बाहरी बंदरों को छोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई की मांग
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
लक्ष्मणगढ़ कस्बे और आसपास के इलाकों में इन दिनों बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके हिंसक रवैये से आमजन का जीना दूभर हो गया है। गली-मोहल्लों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक में बंदरों के झुंड का कब्जा है, जिससे लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो चुका है। नगरपालिका द्वारा पूर्व में चलाए गए अभियान भी पूरी तरह बेअसर साबित हुए हैं।
सब्जी की खेती छोड़ने को मजबूर हुए किसान
बंदरों के आतंक का सबसे बड़ा असर स्थानीय कृषि पर पड़ा है।
- फसलों की तबाही: किसान मांगेलाल ने बताया कि खेत में बोई गई 50% से अधिक फसल बंदर पूरी तरह तबाह कर देते हैं। घरों के गमले और छोटे पौधों तक को उखाड़ फेंका जाता है।
- खेती से तौबा: किसान गंगा लहरी प्रजापत के अनुसार, बंदरों के खौफ से कई किसानों ने सब्जियों की खेती करना ही छोड़ दिया है।
बाजार में छिनैती, बच्चों में खौफ
ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, तहसील परिसर और मुख्य बाजारों में सैकड़ों बंदर हर वक्त घूमते दिखते हैं। बाजार से गुजरने वाले राहगीरों के हाथों से सामान और खाने-पीने की चीजें झपटना आम बात हो गई है। स्कूली बच्चों को अकेले भेजने में परिजन कतरा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक हीरालाल सैनी और महेश शर्मा ने बताया कि बंदर जब झुंड में हमला करते हैं तो उन पर काबू पाना नामुमकिन हो जाता है।
"बाहर से लाकर छोड़े जा रहे बंदर, हो कड़ी कार्रवाई"
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अन्य इलाकों से गाड़ियों में भरकर बंदरों को यहां लाकर छोड़ दिया जाता है, जिससे यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है। ग्रामीणों ने पूर्व में नगरपालिका को लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर रोष जताया है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बाहरी बंदरों को छोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द अभियान चलाकर बंदरों को पकड़वाया जाए।

