जिला तो बन गया, पर छीन गईं बसें! 20 मिनट का सफर अब 2 घंटे का इंतजार... 150 गांवों के यात्री बेहाल
जिला तो बना पर सुविधाएं घटीं: खैरथल-मुंडावर-बहरोड़ रूट पर रोडवेज की मनमानी, 150 गांवों का आवागमन हुआ राम भरोसे
हीरालाल भूरानी | खैरथल-तिजारा
खैरथल को जिला बने लंबा समय बीतने के बाद भी धरातल पर यात्रियों को राहत के बजाए आफत का सामना करना पड़ रहा है। खैरथल-मुंडावर-बहरोड़ रूट पर रोडवेज बसों का बेड़ा सुधरने के बजाय और सिमट गया है। जिस रूट पर कभी हर 20 मिनट में फर्राटा भरती बसें मिल जाती थीं, वहां अब यात्रियों को एक से दो घंटे तक चिलचिलाती धूप और बारिश में इंतजार करना पड़ रहा है।
7 से घटकर रह गईं सिर्फ 5 बसें
बसों और चालक-परिचालकों की भारी किल्लत के कारण इस रूट का शेड्यूल पूरी तरह चरमरा गया है।
- 150+ गांव प्रभावित: रूट के 40 से अधिक स्थायी-अस्थायी स्टॉपेज से रोजाना हजारों ग्रामीण यात्रा करते हैं।
- घट गए फेरे: पहले जहां 7 बसें चलती थीं, वहीं अब इसे घटाकर महज 5 बसों के भरोसे छोड़ दिया गया है।
न बस स्टैंड, न टीन शेड, न शौचालय!
खैरथल बस स्टैंड को छोड़ दें तो पूरे रूट पर यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह नदारद हैं।
हरसौली, मुंडावर, सोडावास और बलडोद जैसे प्रमुख स्थानों पर पक्के प्लेटफॉर्म या टीन शेड तक नहीं हैं। मजबूरी में यात्रियों को दुकानों की सीढ़ियों पर बैठना पड़ता है। सबसे दर्दनाक स्थिति महिला यात्रियों की है—शौचालय की सुविधा न होने के कारण उन्हें खेतों या खाली पड़े स्थानों की ओर रुख करना पड़ता है।
अधिकारी का क्या है कहना?
"फिलहाल इस रूट पर उपलब्ध स्टाफ और बसों के अनुसार 5 बसें संचालित की जा रही हैं। जैसे ही नए चालक-परिचालक उपलब्ध होंगे, बसों के फेरों की समीक्षा कर बढ़ोतरी की जाएगी।"
— मंजू गोस्वामी, आगार प्रबंधक, कोटपूतली

