राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं को सालों से खोखला करने वाले पेपर लीक गैंग का बड़ा खिलाड़ी पुलिस के शिकंजे में
जयपुर (कमलेश जैन)
राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं को सालों से खोखला करने वाले पेपर लीक गैंग का बड़ा खिलाड़ी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया। जिस नाम को एसओजी महीनों से तलाश रही थी, वह ओडिशा के नयागढ़ जिले में अपनी पहचान बदलकर डीजल भरने का काम कर रहा था। आरोपी का नाम विनोद कुमार रेवाड़—एक ऐसा मोहरा जो पूरे पेपर लीक नेटवर्क की रीढ़ माना जाता था। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था ।और कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका था।
विनोद कुमार कोई सामान्य आरोपी नहीं था। वह पेपर लीक माफिया भूपेंद्र सारन और जगदीश बिश्नोई का करीबी सहयोगी था। दोनों ही गैंग लंबे समय से सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं को अपने फायदे का धंधा बना चुके थे। विनोद ने इसी नेटवर्क में बड़ी भूमिका निभाई। उसके पास रेनवाल में कोचिंग सेंटर और एक स्कूल भी था, जहां से उसने अभ्यर्थियों से कनेक्शन बनाए और लीक पेपर की डीलिंग शुरू की।
एसआई भर्ती परीक्षा-2021, वरिष्ठ अध्यापक ग्रेड-द्वितीय और स्कूल लेक्चरर ग्रेड-फर्स्ट—इन तीन बड़ी परीक्षाओं में उसका नाम सीधा सामने आया। हजारों युवाओं के सपनों को इसने सिर्फ पैसों की खातिर चकनाचूर कर धोखा दिया।
गिरफ्तारी से बचने के लिए विनोद ने खुद को पूरी तरह बदल लिया। राजस्थान छोड़ने के बाद वह 1600 किलोमीटर दूर ओडिशा के नयागढ़ में जाकर छुप गया। यहां उसने मजदूरों की भीड़ में खुद को गुमनाम बना लिया। रेलवे ब्रिज बनाने वाले एक ठेकेदार के पास उसने काम पकड़ा। काम भी ऐसा जो किसी को शक न हो—वाहनों में डीजल भरने का छोटा-मोटा काम।
जिस व्यक्ति के नाम से कभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लाखों अभ्यर्थी थर्राते थे, वही आरोपी अब मजदूरों के बीच हाथ में ड्रम लेकर डीजल भरता दिख रहा था। यह दोहरी जिंदगी का ऐसा चेहरा है जो अपराधियों की मजबूरी और डर दोनों बयान कर देता है।
एसओजी को सुराग मिला कि आरोपी अपनी पहचान छुपाकर ओडिशा में रह रहा है। डीआईजी परिस देशमुख के नेतृत्व में एक टीम तैयार की गई। लगातार निगरानी और खुफिया इनपुट जुटाने के बाद टीम नयागढ़ पहुंची। वहां कई दिनों तक रैकी करने के बाद सही मौके पर दबिश दी गई।
एक साधारण सा आदमी, हाथ में पाइप पकड़े वाहनों में डीजल डाल रहा था। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यही राजस्थान का मोस्ट वांटेड आरोपी है। जैसे ही एसओजी ने उसे घेरा, पूरा राज खुल गया।
विनोद कुमार को शुक्रवार दोपहर जयपुर लाया गया और कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 6 दिन के रिमांड पर भेज दिया है। अब एसओजी उससे पूछताछ कर रही है कि पेपर लीक के इस खेल में और कौन-कौन शामिल था।
माना जा रहा है कि आरोपी के पास बड़े नेटवर्क की जानकारी है। यह भी शक है कि कई नेताओं, अधिकारियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोग इस गैंग के साथ जुड़े रहे हैं। क्योंकि पेपर लीक का कारोबार केवल एक-दो लोगों के दम पर नहीं चलता—इसके लिए जाल गहरा और बड़ा होना जरूरी है।
गिरफ्तारी ने यह भी साबित कर दिया कि अपराधी कितना भी दूर भागे, कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं। विनोद ने सोचा था कि राजस्थान से हजारों किलोमीटर दूर जाकर मजदूर बन जाना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। लेकिन तकनीक और खुफिया नेटवर्क के सामने उसकी सारी प्लानिंग धरी की धरी रह गई।
आज जिस शख्स को कभी छात्र गुरुजी कहकर सम्मान देते थे, वही अब पुलिस हिरासत में है। पहचान छुपाकर डीजल भरने वाला यह आरोपी जल्द ही उस पूरे नेटवर्क की असलियत सामने ला सकता है, जिसने राजस्थान के युवाओं का भविष्य बेच डाला।


