डीग में जैन समाज द्धारा श्रद्धा और हर्षोल्लास से मनाया गया क्षमा बानी दिवस
क्षमा वीर का सच्चा आभूषण है- आचार्य विनीत सागर
डीग (नीरज जैन) जैन समाज द्धारा क्षमा बाणी दिवस के अवसर पर शहर के तीनों श्री दिगंबर जैन मंदिरो में प्रातः विशेष पूजा तथा सांय भगवान जितेंद्र पर कालसभिषेक और सामूहिक आर्थिक आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के लोगों ने भाग लिया।
इसके उपरांत सभी लोगों ने एक दूसरे से बड़े विनय भाव से चरण स्पर्श करते हुए वर्ष भर में जाने अनजाने में मन वचन और व्यवहार से हुई गलतियों के लिए चरण स्पर्श करते हुए क्षमा याचना की।इस अवसर पर आचार्य श्री विनीत सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि क्षमा ही सच्चे वीर का आभूषण है।
आचार्य श्री ने कहा कि प्रतिशोध की भावना कभी भी शांति का मार्ग नहीं खोलती। बदला लेने के बाद भी मनुष्य के भीतर स्वतंत्रता और संतोष का अभाव बना रहता है। इसके विपरीत, क्षमा करने से न केवल सामने वाले व्यक्ति का मन शांत होता है, बल्कि क्षमा करने वाला भी आंतरिक शांति और आत्मिक आनंद का अनुभव करता है। क्षमा का भाव द्वेष और वैर की जड़ों को नष्ट कर देता है और आपसी सौहार्द का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन में क्षमा को अपनाता है तो उसके भीतर करुणा और समता के भाव स्वतः विकसित होते हैं। यही भाव जीवन को कलुषित करने वाले क्रोध और अभिमान जैसे विकारों पर नियंत्रण पाने में सहायक बनते हैं। जैन धर्म में क्षमा को सर्वोच्च धर्म बताया गया है और इसे आत्मा की शुद्धि का साधन माना गया है।
जैन समाज द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला क्षमा बाणी दिवस समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करने का कार्य करता है। यह दिवस सभी को यह संदेश देता है कि जीवन में क्षमा से ही वास्तविक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति संभव है।


